मांगलिया टोल नाके के पास हुए सड़क हादसे में घायल निजी कंपनी के अकाउंटेंट अनिल चौहान की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण अनिल की जान चली गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित उपचार मिल जाता, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी।
अनिल को हादसे के बाद राहगीरों ने तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां से उन्हें एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके बाद एंबुलेंस और उपचार व्यवस्था को लेकर परिजनों ने गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
मिनी ट्रक की टक्कर से गंभीर रूप से हुए थे घायल
देवास के जयश्री नगर निवासी 50 वर्षीय अनिल चौहान इंदौर की एक बिल्डिंग मटेरियल कंपनी में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत थे। वह पिछले करीब 15 वर्षों से देवास से इंदौर रोजाना अप-डाउन करते थे।
गुरुवार सुबह करीब 10:45 बजे मांगलिया टोल नाके के पास ईंटों से भरे एक मिनी ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
परिजनों का आरोप- एंबुलेंस में नहीं थी जरूरी सुविधा
हादसे के बाद राहगीरों ने अनिल को मांगलिया स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां से उनकी गंभीर हालत देखते हुए एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके बाद उन्हें पुलिस चौकी ले जाया गया, जहां से 108 एंबुलेंस बुलाई गई।
अनिल के साले देवेंद्र वर्मा का आरोप है कि एंबुलेंस में स्ट्रेचर के अलावा कोई आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी। न ऑक्सीजन सिलेंडर था, न प्राथमिक उपचार की व्यवस्था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चालक ने निजी अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया और केवल एमवाय अस्पताल ले जाने की बात कही।
डेढ़ घंटे में पहुंची एंबुलेंस, रास्ते में चली गई जान
परिजनों के मुताबिक, भारी ट्रैफिक के बीच एंबुलेंस को एमवाय अस्पताल पहुंचने में करीब 1 घंटा 25 मिनट लग गए। उनका आरोप है कि एंबुलेंस में हूटर और प्रभावी सायरन भी नहीं था, जिससे रास्ते में वाहन नहीं हट सके।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बताया कि अनिल की करीब 20 मिनट पहले ही मौत हो चुकी थी। परिजनों का कहना है कि यदि उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाता या रास्ते में प्राथमिक उपचार मिल जाता, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी।
पुलिस और अस्पताल का पक्ष भी आया सामने
अनिल अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी और बेटा ध्रुव चौहान हैं। परिजनों ने पूरे मामले में स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
वहीं, मांगलिया चौकी प्रभारी सत्येंद्र सिंह सिसोदिया का कहना है कि घायल को परिजन सीधे निजी अस्पताल लेकर गए थे। उन्होंने बताया कि संबंधित निजी अस्पताल में भर्ती करने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, इसलिए मरीज को रेफर किया गया।










