मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी। मुख्यमंत्री ने निर्धारित समय सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर समिति के अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित रहे। वहीं समिति की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई, वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित नहीं हो सके।
तीन खंडों में तैयार की गई रिपोर्ट
समिति द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन तीन खंडों में तैयार किया गया है। पहले खंड में समान नागरिक संहिता को लेकर समिति की अनुशंसाएं दी गई हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लागू विभिन्न कानूनों एवं प्रथाओं का अध्ययन कर 10 अध्यायों में विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
दूसरे खंड में प्रस्तावित यूसीसी विधेयक का प्रारूप शामिल है। यह प्रारूप मध्य प्रदेश में वर्तमान में लागू कानूनों और नियमों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। प्रस्तावित विधेयक में 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं।
तीसरे खंड में व्यापक जन-परामर्श का विवरण दिया गया है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और ऑनलाइन माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए थे, जिनमें 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। रिपोर्ट में इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी शामिल किया गया है।
अनुसूचित जनजातियों को UCC से बाहर रखने की अनुशंसा
समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही समिति ने कहा है कि प्रस्तावित कानून तैयार करते समय लैंगिक समानता, संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक परंपराओं और प्रचलित रीति-रिवाजों के सम्मान को प्राथमिकता दी गई है।
समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
विधि विभाग को भेजी गई रिपोर्ट
समिति की अंतिम रिपोर्ट राज्य शासन के विधि विभाग को सौंप दी गई है। अब विधेयक के प्रारूप में आवश्यक संशोधन और वरिष्ठ सचिव समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे मंत्रिपरिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार की तैयारी है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आगामी मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता से संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश किया जाए।










