हेमंत खंडेलवाल मुर्दाबाद, मुर्दाबाद… नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से दतिया में मचा बवाल, देखें वीडियो

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By Raj RathorePublished On: July 10, 2026

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया है। पार्टी ने शुक्रवार को आशुतोष तिवारी को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया। टिकट की घोषणा के बाद दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से नाराज समर्थकों, व्यापारियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने झांसी हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के कारण करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। विरोध कर रहे लोगों ने बाजार बंद कराए और भोपाल जाकर भी प्रदर्शन करने की चेतावनी दी।

इस दौरान कई महिलाएं सड़क पर बैठ गईं और लेटकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारी भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

भाजपा जिला अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

टिकट वितरण के विरोध में भाजपा के दतिया जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह सहित कई पार्षदों और पदाधिकारियों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए। स्थानीय स्तर पर पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी ने दतिया की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।

चुनाव की तैयारी में जुटे थे नरोत्तम मिश्रा

उपचुनाव की घोषणा के बाद से नरोत्तम मिश्रा लगातार क्षेत्र में सक्रिय थे। वे विभिन्न सभाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के बीच पहुंच रहे थे तथा अपनी पिछली राजनीतिक गलतियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांग रहे थे। उन्होंने बुधवार को नामांकन पत्र भी खरीद लिया था और शुक्रवार को नामांकन दाखिल करने की चर्चा थी।

निर्वाचन प्रक्रिया के तहत अब तक 13 उम्मीदवारों ने नामांकन फॉर्म खरीदे हैं, जबकि चार प्रत्याशी अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं।

कौन हैं आशुतोष तिवारी?

भाजपा ने इस बार दतिया उपचुनाव में आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सेवढ़ा सीट से भाजपा टिकट की दावेदारी की थी, हालांकि उस समय पार्टी ने प्रदीप अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया था।

आशुतोष तिवारी भाजपा संगठन में संभागीय संगठन मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इसके अलावा वे मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके हैं, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था।

दतिया उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार बदलने के फैसले के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। अब देखना होगा कि शीर्ष नेतृत्व नाराज कार्यकर्ताओं को कैसे मनाता है और इसका चुनावी मुकाबले पर क्या असर पड़ता है।