मध्य प्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षित निगम-मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का दौर अब गति पकड़ चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने इन पदों पर नियुक्तियां कर न सिर्फ रिक्तियों को भरा है, बल्कि इसके जरिए क्षेत्रीय और संगठनात्मक समीकरणों को साधने का स्पष्ट संकेत भी दिया है।
विशेष रूप से ग्वालियर-चंबल अंचल में यह रणनीति प्रमुखता से दिखाई दे रही है, जहां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीबी नेताओं को प्रतिनिधित्व मिला है।
प्रमुख नियुक्तियों का सियासी गणित
इन नियुक्तियों में सबसे ज्यादा चर्चा में पूर्व सांसद केपी यादव की नियुक्ति रही है, जिन्हें नागरिक आपूर्ति निगम का अध्यक्ष बनाया गया है। यादव वही नेता हैं जिन्होंने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को हराया था। सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद भी यादव कई मुद्दों पर मुखर रहे थे, हालांकि समय-समय पर दोनों नेताओं को साथ भी देखा गया।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने केपी यादव का टिकट काटकर सिंधिया को उम्मीदवार बनाया था। इसके बावजूद केपी यादव ने बगावती तेवर नहीं दिखाए थे, जिस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी देने का संकेत दिया था। इस नियुक्ति को भाजपा द्वारा एक बड़ा संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है।
ग्वालियर विकास प्राधिकरण (GDA) की कमान मधुसूदन भदौरिया को सौंपी गई है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पृष्ठभूमि से आते हैं और भाजपा संगठन में महामंत्री भी रह चुके हैं। इसे संघ और संगठन के प्रतिनिधित्व के रूप में देखा जा रहा है। GDA के उपाध्यक्ष पद पर सुधीर गुप्ता को नियुक्त किया गया है, जिन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया का समर्थक माना जाता है, जबकि वेद प्रकाश शिवहरे नरेंद्र सिंह तोमर खेमे से जुड़े हैं। इसी तरह, ग्वालियर मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष पद पर अशोक जादौन और उपाध्यक्ष पद पर उदयवीर सिंह गुर्जर को नियुक्त किया गया है। अशोक जादौन को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का करीबी माना जाता है।
संगठन, संघ और नए सहयोगियों को महत्व
ग्वालियर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष अशोक शर्मा को बनाया गया है। वे पहले कांग्रेस में थे और बाद में भाजपा में शामिल हुए। उन्हें सिंधिया खेमे से जोड़कर देखा जाता है। पूर्व विधायक रामनिवास रावत की नियुक्ति भी चर्चा का विषय है, जिन्हें वन विकास निगम लिमिटेड का अध्यक्ष बनाया गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए रावत को पहले वन मंत्री बनाया गया था, लेकिन उपचुनाव हारने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। उन्हें मुख्यमंत्री मोहन यादव के करीबी नेताओं में गिना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से भाजपा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक और पार्टी में शामिल हुए नए सहयोगियों समेत सभी को साथ लेकर चलने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। यह मुख्यमंत्री मोहन यादव की समावेशी राजनीति का भी परिचायक है, जिसका उद्देश्य पार्टी में एकता और संतुलन बनाए रखना है।










