बंगाल चुनाव: दिल्ली-बिहार में 80% स्ट्राइक रेट से NDA को जीत दिलाने वाले योगी आदित्यनाथ ने कैसे बढ़ाई ममता बनर्जी की चिंता?

Author Picture
By Raj RathorePublished On: April 25, 2026
CM Yogi

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रभाव चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में, भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को सीएम योगी के सामने साष्टांग दंडवत प्रणाम करते देखा गया, जो योगी के बढ़ते कद का एक और प्रमाण है। आज योगी आदित्यनाथ भारतीय राजनीति के ‘पोस्टर बॉय’ बन चुके हैं, जिनकी एक दहाड़ विरोधी खेमे में खलबली मचाने के लिए काफी है।

बंगाल के विधानसभा चुनावों में भी योगी का ‘जलवा’ स्पष्ट रूप से दिखा, जिसने उन्हें भाजपा का एक महत्वपूर्ण ‘ट्रंप कार्ड’ साबित कर दिया। जब-जब योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर बंगाल की धरती पर उतरा, तो नजारा अद्भुत था। मालदा से लेकर मेदिनीपुर तक, उनकी रैलियों में ऐसा जनसैलाब उमड़ा मानो कोई धार्मिक उत्सव हो।

सीएम योगी ने अपनी रैलियों में सीधे ‘दीदी’ (ममता बनर्जी) को चुनौती दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यूपी में जिस तरह माफियाओं का इलाज किया गया है, बंगाल में भी वही फॉर्मूला लागू होगा।” उनकी रैलियों में ‘बुलडोजर’ और ‘कानून व्यवस्था’ के नारों ने युवाओं के बीच एक अलग ही उत्साह पैदा किया, जिससे टीएमसी के वोट बैंक में सेंध लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

” 2017 तक यूपी भी पश्चिम बंगाल की तरह तुष्टिकरण और गुंडागर्दी से त्रस्त था, लेकिन आज वहां उपद्रव नहीं, उत्सव होता है। यूपी में अब कोई दंगा नहीं, सब चंगा है। ” — योगी आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ ने अपने चिर परिचित अंदाज में न केवल भाजपा के लिए वोट मांगे, बल्कि ममता दीदी की सरकार को भी जमकर निशाने पर लिया। उन्होंने बाबरी मस्जिद, काबा और बांग्लादेश में हिंदू दलितों की हत्या जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बातें रखीं। उन्होंने अपनी जनसभाओं में उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को सामने रखते हुए नारा दिया, ‘ना गौ माता को कटने देंगे, ना हिंदुओं को बंटने देंगे।’

दिल्ली-बिहार में योगी का ‘स्ट्राइक रेट’

दरअसल, सीएम योगी सिर्फ भीड़ नहीं जुटाते, वे उसे वोटों में तब्दील करना भी बखूबी जानते हैं। उनके पिछले चुनावी रिकॉर्ड्स पर नजर डालें तो आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने 15 से अधिक जिलों में करीब 25 रैलियां की थीं। इसका नतीजा यह हुआ कि जिन 98 सीटों पर योगी ने प्रचार किया, वहां एनडीए (NDA) का स्ट्राइक रेट लगभग 80% रहा। उनकी रैलियों का ही असर था कि सीमांचल जैसे कठिन माने जाने वाले इलाकों में भी भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

दिल्ली के दंगों और शाहीन बाग के शोर के बीच जब योगी आदित्यनाथ की चुनावी राजनीति में एंट्री हुई, तो पूरी चुनावी फिजा ही बदल गई। मंगोलपुरी, संगम विहार, जनकपुरी, घोंडा, शाहदरा, उत्तम नगर, द्वारका, बिजवासन, पालम, राजेंद्र नगर और पटपड़गंज ऐसी सीटें थीं, जहां सीएम योगी ने चुनावी प्रचार किया और वहां भाजपा ने जीत हासिल की।

‘हिंदुत्व’ और ‘कानून व्यवस्था’ का मॉडल

ये आंकड़े स्पष्ट रूप से संकेत देते हैं कि योगी आदित्यनाथ की रैलियों में जुटी भीड़ केवल भीड़ नहीं थी, बल्कि वोटों में भी तब्दील हुई। चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, उनका हिंदुत्व एजेंडा और उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का मॉडल ऐसे प्रमुख मुद्दे हैं, जिनका प्रभावी जवाब विपक्ष के पास फिलहाल नहीं दिखता।

दिल्ली-बिहार की तरह बंगाल में योगी का जादू कितना चला, इसके लिए 4 मई का इंतजार करना होगा। लेकिन उत्तर प्रदेश के बाहर योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता और उनका राजनीतिक दबदबा निरंतर बढ़ता ही जा रहा है, और भविष्य में भी इसके जारी रहने की उम्मीद है।