Honey Singh Concert Indore : मिनी मुंबई के नाम से मशहूर इंदौर में लाइव कॉन्सर्ट का क्रेज अब आयोजकों के लिए घाटे का सौदा बनता जा रहा है। पिछले डेढ़ महीने में शहर में तीन बड़े कलाकारों के शो रद्द हुए हैं। इससे संगीत प्रेमियों को निराशा हाथ लगी है, वहीं शहर की अर्थव्यवस्था को भी तगड़ा झटका लगा है।
इन लगातार रद्द हो रहे आयोजनों के पीछे मुख्य वजह उम्मीद से बेहद कम टिकटों की बिक्री और प्रशासन की जटिल टैक्स प्रक्रिया है। आयोजकों का मानना है कि अब इंदौर में बड़े कॉन्सर्ट कराना जोखिम भरा काम हो गया है।
3 बड़े शो हुए रद्द
पिछले महीने 15 मार्च को शंकर-एहसान-लॉय का शो रद्द हुआ था। इसके बाद 4 अप्रैल को सलीम-सुलेमान का कार्यक्रम भी ऐन वक्त पर कैंसिल हो गया। आज 25 अप्रैल को होने वाला हनी सिंह का मेगा इवेंट भी रद्द कर दिया गया है।
प्रस्तावित हनी सिंह के शो के लिए आयोजकों ने 15 से 20 हजार दर्शकों का लक्ष्य रखा था। हालांकि, धरातल पर सिर्फ 6 से 7 हजार टिकट ही बिक पाए। सूत्रों के अनुसार, अकेले हनी सिंह की फीस करीब 3 करोड़ रुपए थी। पूरे शो का तामझाम 8 से 10 करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है।
आयोजकों का कहना है कि शहर में बैक-टू-बैक बड़े इवेंट्स होने से दर्शकों का उत्साह बंट गया है। लोग अब हर शो के लिए मोटी रकम खर्च करने को तैयार नहीं हैं।
टैक्स और फ्री पास की ‘दोहरी मार’
इंदौर में इवेंट इंडस्ट्री की राह में प्रशासनिक प्रक्रिया सबसे बड़ी बाधा है। जयपुर, चंडीगढ़ और अहमदाबाद जैसे शहरों में सिंगल विंडो पोर्टल से सभी अनुमतियां मिल जाती हैं। वहीं, इंदौर में आयोजकों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
इसके अलावा, कुल रेवेन्यू पर 10 फीसदी टैक्स लगता है। प्रशासनिक विभागों में बांटे जाने वाले करीब 1500 ‘फ्री पास’ आयोजकों की कमर तोड़ देते हैं। अतीत में भी टैक्स विवाद के कारण करण औजला और हनी सिंह के शो के दौरान नगर निगम ने सामान जब्त किया था। इन घटनाओं से राष्ट्रीय स्तर पर शहर की साख को नुकसान पहुंचा है।
अर्थव्यवस्था पर असर
इन शो के रद्द होने का असर सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है। एक बड़े कॉन्सर्ट से इंदौर के होटलों में ऑक्यूपेंसी 90 फीसदी तक पहुंच जाती है। बाहर से आने वाली टीमों और फैंस की वजह से कैब, रेस्टोरेंट और लोकल फूड स्टॉल संचालकों की अच्छी कमाई होती है।
एक अनुमान के मुताबिक, एक बड़े इवेंट से सिक्योरिटी, पार्किंग, लाइटिंग और साउंड जैसे क्षेत्रों में 3 से 5 हजार लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलता है। आयोजकों का कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो बड़े कलाकार और इवेंट कंपनियां इंदौर से मुंह मोड़ सकती हैं। प्रशासन को टैक्स और परमिशन की प्रक्रिया सरल करनी होगी, तभी इंदौर फिर से बड़े आयोजनों का केंद्र बन पाएगा।











