अंदर ही अंदर जम रहा था लावा, 21 दिन में फटा ज्वालामुखी… Raghav Chadha की AAP को धोखा देने की Inside Story

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By Raj RathorePublished On: April 24, 2026
Raghav Chadha Leaves AAP

Raghav Chadha Leaves AAP : भारतीय राजनीति के लिए 24 अप्रैल, शुक्रवार का दिन महत्वपूर्ण रहा। आम आदमी पार्टी (आप) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने ‘आप’ छोड़ दी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का ऐलान किया।

राघव चड्ढा के साथ ‘आप’ के दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। अपनी ही पार्टी में इतनी बड़ी फूट की कल्पना शायद अरविंद केजरीवाल ने कभी नहीं की होगी। इस घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी है।

बगावत की इनसाइड स्टोरी: दो साल से पक रहा था गुस्सा

राघव चड्ढा का यह फैसला अचानक नहीं हुआ। दरअसल, यह असंतोष पिछले दो सालों से धीमी आंच पर पक रहा था। आप द्वारा हाल ही में चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटाया जाना इस असंतोष की अहम वजह बनी। पार्टी के इस फैसले के बाद राघव चड्ढा ने खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी थी। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जाने लगे थे कि ‘आप’ और राघव चड्ढा के बीच सब कुछ ठीक नहीं है।

कहा जाता है कि राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। दिल्ली में यह बात एक बार फिर सच साबित हुई। चड्ढा ने अचानक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और चौंकाने वाला ऐलान किया। उन्होंने बताया कि ‘आप’ के दो-तिहाई राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का फैसला तब लिया, जब ‘आप’ ने उन पर कार्रवाई की थी। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी किया था। इसमें उन्होंने अपना कसूर पूछते हुए कहा था कि वह आम लोगों की आवाज उठाने की कोशिश कर रहे थे और पार्टी ने उन्हें खामोश कर दिया। उन्होंने अपने वीडियो संदेश में एक चेतावनी भी दी थी।

“मेरी खामोशी को मेरी हार न समझ लेना, मैं वो दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।” — राघव चड्ढा

केजरीवाल की गिरफ्तारी और बढ़ती दूरियां

राघव चड्ढा ने भले ही अब बड़ा फैसला लिया है, लेकिन इसके संकेत दो साल पहले से ही मिलने शुरू हो गए थे। मार्च 2024 में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कथित शराब घोटाले में गिरफ्तारी हुई। उस दौरान ‘आप’ के सभी नेता केजरीवाल के समर्थन में एकजुट खड़े थे। इसके विपरीत राघव चड्ढा चुप रहे थे, जिससे अटकलों का दौर शुरू हो गया।

हालांकि, बाद में चड्ढा ने केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर खुशी जताई थी। यह भी उल्लेखनीय है कि जिस दौरान कथित शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल जेल गए थे, राघव चड्ढा आंखों के ऑपरेशन के लिए विदेश में थे। उनकी अनुपस्थिति ने पार्टी में उनके अलगाव की अटकलों को और तेज कर दिया था। विदेश से लौटने के बाद राघव चड्ढा ने पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। बावजूद इसके, कई मौकों पर उनकी अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर सवाल खड़े किए।

साथ छोड़ने वाले अन्य सांसद

‘आप’ से अलग होने वाले राज्यसभा सांसदों में राघव चड्ढा के साथ स्वाति मालिवाल, अशोक कुमार मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, बलबीर सिंह और विक्रमजीत सिंह साहनी का नाम शामिल है। यह संख्या ‘आप’ के कुल राज्यसभा सांसदों के दो-तिहाई हिस्से को दर्शाती है।

हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले कुछ समय में संसद की कार्यवाही में केवल राघव चड्ढा ही सक्रिय रूप से बोलते नजर आए थे। वह भी कथित तौर पर पार्टी के मुद्दों से हटकर दूसरे मामले उठा रहे थे। वहीं, ‘आप’ से अलग होने वाले अन्य सांसद भी पिछले समय में ज्यादा सक्रिय नहीं दिखे थे। स्वाति मालिवाल पहले से ही केजरीवाल के विरोध में रही हैं। हरभजन सिंह भी उतने सक्रिय नहीं रहे और कई पार्टी कार्यक्रमों से अनुपस्थित थे। हाल ही में ‘आप’ ने राघव चड्ढा की जगह अशोक कुमार मित्तल को राज्यसभा में उपनेता बनाया था, लेकिन उन्होंने भी बगावत कर भाजपा का दामन थाम लिया।

भगवंत मान का तीखा हमला

इस घटनाक्रम पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बागियों को ‘गद्दार’ बताया और उन पर जमकर बरसे। मान ने कहा कि इन गद्दारों को भाजपा में कुछ नहीं मिलेगा। इस दलबदल के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा में शामिल होते ही राघव चड्ढा और अन्य सांसदों की राज्यसभा सदस्यता चली जाएगी। दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता पर तलवार लटक सकती है, जिसकी कानूनी विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जा रही है।