प्रधानमंत्री Narendra Modi शनिवार को महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के मौके पर संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।
इसी कार्यक्रम के बीच एक ऐसा पल सामने आया जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रधानमंत्री मोदी अपनी कार से उतरने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi से बातचीत करते नजर आए।
सहज मुलाकात
संसद परिसर में हुई यह मुलाकात भले ही कुछ ही मिनटों की रही हो, लेकिन इसमें सहजता साफ झलक रही थी। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से मुस्कुराकर बातचीत की और कुछ देर तक संवाद किया। वीडियो में देखा गया कि दोनों नेता आमने-सामने खड़े होकर ध्यान से बातचीत कर रहे हैं। इस दौरान आसपास मौजूद लोग भी कुछ क्षणों के लिए रुक गए, जिससे यह दृश्य और खास बन गया।
राजनीतिक माहौल के बीच अलग संदेश
देश की राजनीति में सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच अक्सर तीखी बयानबाजी देखने को मिलती है। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के बीच इस तरह की बातचीत ने एक सकारात्मक संकेत दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात दिखाती है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद और सौहार्द लोकतंत्र की मजबूत नींव हैं।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi arrives at Prerna Sthal on the Parliament premises to pay a floral tribute to Mahatma Jyotiba Phule on his 200th birth anniversary today.
Lok Sabha Speaker Om Birla, Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, Union Minister Arjun Ram Meghwal, former… pic.twitter.com/QexqUVky1Z
— ANI (@ANI) April 11, 2026
कई बड़े नेता भी रहे मौजूद
इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष Om Birla, केंद्रीय मंत्री Arjun Ram Meghwal और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति Harivansh Narayan Singh समेत कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर महात्मा ज्योतिबा फुले के सामाजिक न्याय, शिक्षा और वंचित वर्गों के उत्थान में दिए गए योगदान को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी की यह छोटी सी बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। कई यूजर्स ने इस पल को सकारात्मक और प्रेरणादायक बताते हुए इसकी सराहना की। लोगों का कहना है कि ऐसे दृश्य राजनीति में संवाद और आपसी सम्मान की अहमियत को दर्शाते हैं। संसद परिसर में हुई यह मुलाकात भले ही अनौपचारिक रही हो, लेकिन इसने एक बड़ा संदेश जरूर दिया है।











