इजराइल-ईरान तनाव: इंदौर-पीथमपुर में 30 हजार रोजगार हुए खत्म, संकट में फंसे 5000 उद्योग

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By Raj RathorePublished On: April 1, 2026

Israel Iran War Impact on Indore : अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर भारत के औद्योगिक हब पर भी दिखने लगा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण मध्य प्रदेश का औद्योगिक परिदृश्य चिंताजनक स्थिति में पहुँच गया है।

विशेषकर इंदौर और पीथमपुर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे हजारों रोजगार समाप्त हो गए हैं और बड़ी संख्या में उद्योग संकट का सामना कर रहे हैं। कच्चे माल के दाम और माल ढुलाई का खर्च कई गुना बढ़ गया है, जिसने उद्योगों की कमर तोड़ दी है।

मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतें 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। कुछ मामलों में तो कच्चे माल के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। इसका सीधा परिणाम उत्पादन की लागत में वृद्धि के रूप में सामने आया है।

कई फैक्ट्रियों को मजबूरन काम की शिफ्टें कम करनी पड़ी हैं, जिससे हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो कई उद्योगों में शटडाउन की नौबत आ सकती है।

प्लास्टिक उद्योग पर दोहरी मार

पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी ने बताया कि प्लास्टिक उद्योग इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। प्लास्टिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं।

पीवीसी, पाइप और बोतलें बनाने वाली कई कंपनियों को अपना परिचालन बंद करना पड़ा है। पीथमपुर में 100 से अधिक फैक्ट्रियां गैस पर चलती हैं, जिनमें अब 50 प्रतिशत कम गैस मिल रही है।

इससे दो से तीन शिफ्ट में काम करने वाली कंपनियों में केवल एक शिफ्ट ही चल पा रही है। डॉ. कोठारी के अनुसार, इससे प्रत्यक्ष रूप से 20 हजार से अधिक लोगों का रोजगार खत्म हुआ है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से 10 हजार लोगों का काम प्रभावित हुआ है।

इसके साथ ही, लगभग 25 हजार कर्मचारियों की तनख्वाह आधी हो गई है। प्लास्टिक दाने की कीमत बढ़ने से कई अन्य इकाइयां भी बंद होने की कगार पर हैं, जिसमें वर्जिन दाना 30 प्रतिशत तक महंगा हुआ है।

इंदौर और आसपास के लगभग 5000 से अधिक उद्योग अपने कच्चे माल की जरूरत के लिए 60 प्रतिशत तक मध्य पूर्व के देशों पर निर्भर हैं। बहरीन, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से आने वाले बल्क ड्रग और पेट्रोकेमिकल्स की आपूर्ति बाधित हुई है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के कारण चीन और यूरोप से होने वाले आयात पर भी बुरा असर पड़ा है। समुद्री रास्तों में जोखिम बढ़ने से जहाजों का बीमा कराना भी कठिन हो गया है।

फार्मा सेक्टर में संकट

ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (एआईओसीडी) के महासचिव राजीव सिंघल ने बताया कि मध्य प्रदेश का फार्मा उद्योग भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। व्यापार में गिरावट दर्ज की गई है। सिंघल के मुताबिक, “एक माह तक जैसे-तैसे स्थिति संभाली जा सकती है, लेकिन उसके बाद चुनौती बढ़ जाएगी।”

गैस की कमी के कारण फार्मा कंपनियों में इंजेक्शन उत्पादन प्रभावित हो रहा है। दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पैरासिटामॉल पाउडर और अन्य रसायनों की कीमतों में रातों-रात 20 फीसदी से अधिक का उछाल आया है।

पैरासिटामॉल पाउडर की कीमत 290 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 360 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गई है। इसके अलावा, पैकेजिंग सामग्री जैसे प्लास्टिक दाना और पीपी की दरें भी बढ़ गई हैं। ग्लिसरीन की कीमतों में 64 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। फार्मा सेक्टर में कच्चे माल के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़ने से निर्यात भी रुक गया है।

स्थिति यह है कि अगले 10 से 12 दिनों के बाद दवाओं की सप्लाई और उत्पादन को लेकर बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों को परेशानी न हो, इसके लिए बाजार में दवाओं की कीमतें नहीं बढ़ाई जा रही हैं। वहीं, सरकार ने कुछ दवाओं पर 6.50 प्रतिशत दाम बढ़ाए हैं जो जल्द ही बाजार में देखने को मिलेंगे।

लॉजिस्टिक्स लागत में भारी वृद्धि

निर्यात के मोर्चे पर उद्योगपतियों को माल भेजने में भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। कंटेनर भाड़ा पहले की तुलना में 5 गुना तक बढ़ चुका है, जिससे लॉजिस्टिक और शिपिंग की लागत कई गुना बढ़ गई है।

मध्य प्रदेश से होने वाले कुल निर्यात में इंदौर की हिस्सेदारी लगभग 40 से 50 फीसदी है। हर महीने हजारों कंटेनर कांडला और जेएनपीटी बंदरगाहों पर भेजे जाते हैं, लेकिन फ्रेट चार्ज बढ़ने और शिपिंग में देरी के कारण विदेशी ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

भुगतान की नई शर्तें

कच्चे माल के साथ-साथ ईंधन की उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या बन गई है। एलपीजी की कमी के कारण कई उद्योगों को पीएनजी पर निर्भर होना पड़ रहा है। गैस कंपनियों ने अब उधार की सुविधा बंद कर दी है और नकद भुगतान की शर्त रख दी है। पहले जहां भुगतान के लिए एक से दो हफ्ते का समय मिलता था, वहीं अब तुरंत पैसे देने पड़ रहे हैं, जिससे उद्योगों की कार्यशील पूंजी पर भारी दबाव पड़ गया है।

इंदौर के पीथमपुर, सांवेर रोड और पालदा क्षेत्र में 5600 से अधिक उद्योग संचालित हैं, जिनमें से 10 से 15 प्रतिशत फैक्ट्रियों ने अपनी कार्यपालियों को दो शिफ्ट से घटाकर एक कर दिया है। इंदौर से हर महीने 80 हजार से अधिक कंटेनर कांडला और जेएनपीटी बंदरगाहों के लिए भेजे जाते हैं, जिनकी आवाजाही भी प्रभावित हुई है।