अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं और खुद का कारोबार शुरू करना चाहते हैं लेकिन पैसों की कमी आपके सपनों के बीच बाधा बन रही है, तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने ऐसी योजना शुरू की है, जिसके तहत युवाओं को अपना स्टार्टअप या छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए लाखों रुपये की मदद दी जाती है। खास बात यह है कि इस सहायता के लिए युवाओं को ब्याज का बोझ नहीं उठाना पड़ता, जिससे वे आसानी से अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं।
क्या है ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना
उत्तर प्रदेश सरकार की Mukhyamantri Yuva Udyami Vikas Abhiyan योजना खासतौर पर उन युवाओं के लिए शुरू की गई है जो रोजगार तलाशने के बजाय खुद का व्यवसाय स्थापित करना चाहते हैं। इस योजना के तहत युवाओं को बिजनेस शुरू करने के लिए बैंक के माध्यम से लोन उपलब्ध कराया जाता है, जो काफी हद तक ब्याज मुक्त होता है। इसके साथ ही लाभार्थियों से किसी प्रकार की गारंटी भी नहीं मांगी जाती। योजना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सफल उद्यमी बनने के लिए प्रेरित करना है।
अगले दस वर्षों में लाखों युवाओं को मिलेगा लाभ
सरकार ने इस योजना के जरिए बड़े स्तर पर युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। योजना के अंतर्गत आने वाले 10 वर्षों में करीब 10 लाख युवाओं को इस पहल का लाभ देने की योजना बनाई गई है। इसका मतलब है कि हर साल लगभग 1 लाख युवाओं को आर्थिक सहायता देकर अपना व्यवसाय शुरू करने का मौका दिया जाएगा। इससे प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और युवा आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगे।
योजना के तहत कितना मिलेगा लोन
इस योजना को दो चरणों में लागू किया गया है। पहले चरण में युवाओं को 5 लाख रुपये तक की परियोजना शुरू करने के लिए करीब 4.5 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है। इसमें एक बड़ी राहत यह है कि शुरुआत के 6 महीनों तक लोन की किस्त चुकाने से छूट मिलती है। यदि लाभार्थी पहले चरण का लोन समय पर चुका देता है, तो उसे दूसरे चरण में 10 लाख रुपये तक का लोन लेने का अवसर भी मिलता है। इस चरण में सरकार की ओर से लगभग 50 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी भी प्रदान की जाती है।
आवेदन के लिए जरूरी पात्रता और शर्तें
इस योजना का लाभ केवल उत्तर प्रदेश के निवासियों को ही दिया जाता है। आवेदन करने वाले युवक या युवती की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके साथ ही उम्मीदवार कम से कम आठवीं कक्षा पास होना जरूरी है। इसके अलावा आवेदक के पास किसी प्रकार का स्किल सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री होना भी आवश्यक है, जिससे यह साबित हो सके कि वह प्रस्तावित व्यवसाय को संचालित करने की क्षमता रखता है।
अपनी श्रेणी के अनुसार करना होगा आंशिक निवेश
योजना के तहत सरकार पूरी राशि अकेले नहीं देती, बल्कि लाभार्थी को भी अपनी श्रेणी के अनुसार कुछ प्रतिशत निवेश करना होता है। सामान्य वर्ग के आवेदकों को परियोजना में लगभग 15 प्रतिशत योगदान देना होता है, जबकि ओबीसी वर्ग के लिए यह हिस्सा करीब 12.5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और दिव्यांगजनों के लिए यह योगदान मात्र 10 प्रतिशत रखा गया है। इसके अलावा सरकार लाभार्थियों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी देती है, जिससे वे अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक चला सकें।










