एमपी के पंचायत शिक्षकों को बड़ी राहत, सरकारी कर्मचारियों के समान मिलेगा वेतनमान, आदेश हुआ जारी

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By Pinal PatidarPublished On: March 15, 2026

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर स्थित खंडपीठ ने प्रदेश के पंचायत शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने पहले दिए गए फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि पंचायत शिक्षकों को अन्य सरकारी कर्मचारियों के समान वेतनमान का अधिकार है। कोर्ट के इस फैसले से लंबे समय से वेतनमान और वेतन आयोग के लाभ की मांग कर रहे हजारों पंचायत शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

सरकार की पुनर्विचार याचिका कोर्ट ने की खारिज

राज्य सरकार ने पहले दिए गए आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। सरकार का कहना था कि अदालत ने पंचायत शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतनमान देने के संबंध में जो आदेश दिया है, उसमें संशोधन किया जाना चाहिए। हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और साफ कहा कि पूर्व में दिया गया निर्णय पूरी तरह उचित है। इसी के साथ अदालत ने सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी और पहले के आदेश को कायम रखा।

छठे वेतन आयोग का लाभ 2006 से देने का आदेश

इस मामले में कोर्ट पहले ही राज्य सरकार के 29 दिसंबर 2017 के आदेश को निरस्त कर चुका था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि पंचायत शिक्षकों को भी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह छठे वेतन आयोग का लाभ 1 जनवरी 2006 से मिलना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि शिक्षकों को मिलने वाली बकाया राशि का भुगतान 6 प्रतिशत ब्याज के साथ किया जाए। इस फैसले के बाद सरकार ने इसे चुनौती देते हुए हाईकोर्ट की युगलपीठ में अपील दायर की थी।

युगलपीठ में भी सरकार को नहीं मिली राहत

राज्य सरकार ने अपनी अपील में तर्क दिया था कि एकलपीठ ने गलत तरीके से पंचायत शिक्षकों को 1 जनवरी 2006 से वेतन आयोग का लाभ देने का आदेश दिया है, जबकि सरकार के अनुसार यह लाभ 1 अप्रैल 2007 से लागू होना चाहिए। हालांकि हाईकोर्ट की युगलपीठ ने भी सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए सरकार की अपील खारिज कर दी। इसके बाद सरकार ने मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिसे अब अदालत ने खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने कहा- पंचायत शिक्षकों को समान वेतन का अधिकार

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने स्पष्ट किया कि पंचायत कर्मचारियों को समान वेतनमान देने का मुद्दा पहले ही कई न्यायिक फैसलों में तय किया जा चुका है। अदालत ने कहा कि पूर्व के निर्णयों में साफ तौर पर कहा गया है कि पंचायत कर्मचारी भी सरकारी कर्मचारियों के बराबर ही वेतन और अन्य लाभ पाने के हकदार हैं। जब राज्य सरकार स्वयं पंचायत कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों के बराबर वेतन देने का फैसला कर चुकी है, तो उनके साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता।

सरकारी आदेश के खिलाफ शिक्षकों ने दी थी चुनौती

दरअसल, 7 जुलाई 2017 और 29 दिसंबर 2017 को राज्य सरकार ने आदेश जारी करते हुए यह तय किया था कि पंचायत शिक्षकों को छठे वेतन आयोग का लाभ उनकी नियुक्ति की वास्तविक तारीख से नहीं बल्कि 1 अप्रैल 2007 से प्रभावी रूप से दिया जाएगा। इस फैसले से असंतुष्ट पंचायत शिक्षकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि छठे वेतन आयोग का लाभ उन्हें उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से ही दिया जाना चाहिए।

फैसले से हजारों शिक्षकों को मिल सकती है राहत

पंचायत शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उनके पक्ष को सही माना और कहा कि यदि अन्य सरकारी कर्मचारियों को 1 जनवरी 2006 से वेतन आयोग का लाभ दिया गया है, तो पंचायत शिक्षकों को इससे अलग नहीं रखा जा सकता। अब पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद यह फैसला पूरी तरह बरकरार हो गया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश के हजारों पंचायत शिक्षकों को वेतनमान और बकाया राशि का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।