वैदिक ज्योतिष के अनुसार 15 मार्च की अल सुबह सूर्य देव कुंभ राशि से निकलकर राशि चक्र की अंतिम राशि मीन में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस गोचर के साथ ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। वहीं दूसरी ओर 19 मार्च से हिंदू नववर्ष 2026 की भी शुरुआत होने जा रही है, जिसके कारण धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का विशेष महत्व बढ़ जाएगा। इस समय में लोग पूजा-पाठ, दान और साधना जैसे कार्य करना शुभ मानते हैं।
14 अप्रैल को खत्म होगा खरमास, फिर शुरू होंगे शुभ कार्य
हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास आरंभ हो जाता है। यह अवधि लगभग एक महीने तक रहती है। इसके बाद 14 अप्रैल को सूर्य जब मेष राशि में प्रवेश करेंगे, तब खरमास समाप्त हो जाएगा। खरमास खत्म होते ही विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। 14 मार्च की मध्यरात्रि के बाद सूर्य का मीन राशि में प्रवेश इस विशेष अवधि की शुरुआत मानी जाती है।
पौराणिक कथा से जुड़ा है ‘खरमास’ का नाम
खरमास नाम के पीछे एक रोचक पौराणिक कथा भी बताई जाती है। मान्यता है कि भगवान सूर्य अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं और इस दौरान वे कहीं भी नहीं रुकते। लगातार रथ खींचने से उनके घोड़े बेहद थक गए और प्यास से व्याकुल हो गए। सूर्य देव को अपने घोड़ों की यह स्थिति देखकर दया आई और वे उन्हें एक तालाब के पास ले गए ताकि वे विश्राम कर सकें।
गधों से रथ चलाने की कथा से पड़ा ‘खरमास’ नाम
कथा के अनुसार जब सूर्य देव ने घोड़ों को पानी पीने और आराम करने के लिए छोड़ा, तब उन्हें यह चिंता हुई कि यदि उनका रथ रुक गया तो ब्रह्मांड की व्यवस्था बाधित हो सकती है। उसी समय उन्हें तालाब के पास दो गधे दिखाई दिए। सूर्य देव ने घोड़ों की जगह उन गधों को रथ में जोत दिया और वे रथ खींचते हुए आगे बढ़ने लगे। लेकिन गधों की गति घोड़ों की तुलना में काफी धीमी थी, जिससे सूर्य की चाल भी धीमी हो गई और उनका तेज भी कम हो गया। गधों द्वारा रथ खींचे जाने के कारण इस अवधि को ‘खरमास’ कहा जाने लगा। एक महीने बाद जब सूर्य अपने घोड़ों के पास लौटते हैं, तब यह अवधि समाप्त हो जाती है।
सूर्य गोचर का इन राशियों पर रहेगा सकारात्मक प्रभाव
ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार सूर्य का गोचर मीन राशि में हो रहा है, जो कि गुरु की राशि मानी जाती है। गुरु और सूर्य के बीच मित्रता का संबंध है, इसलिए इस गोचर का कुछ राशियों पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। वृष, मिथुन, कर्क, कन्या और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह समय सामान्य से बेहतर रह सकता है। इन राशियों के लोगों को कार्यक्षेत्र, धन और पारिवारिक जीवन में कुछ अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है।
इन राशियों को रहना होगा सावधान
वहीं कुछ राशियों के लिए सूर्य का यह गोचर चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार धनु राशि के लिए यह चौथे भाव में रहेगा, जबकि सिंह राशि के लिए आठवें भाव में और मेष राशि के लिए बारहवें भाव में रहेगा। हालांकि सिंह सूर्य की स्वराशि होने के कारण इसके जातकों पर इसका प्रभाव मिलाजुला रह सकता है। इसके अलावा धनु, मेष और तुला राशि के लोगों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। तुला राशि में सूर्य नीच का माना जाता है, इसलिए इन जातकों को निर्णय लेने में सतर्क रहना चाहिए।










