उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को ट्रैफिक जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलने जा रही है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री Rajnath Singh और मुख्यमंत्री Yogi Adityanath झूलेलाल वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही तीसरे और चौथे चरण के निर्माण कार्यों का शिलान्यास भी किया जाएगा। इस कॉरिडोर के शुरू होने के बाद डालीगंज से निशातगंज होते हुए समता मूलक चौक तक यातायात काफी तेज और सुगम हो जाएगा।
299 करोड़ की लागत से तैयार हुआ दूसरा चरण
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण का निर्माण लगभग 299 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया है। करीब 7 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में डालीगंज से निशातगंज होते हुए समता मूलक चौक तक का हिस्सा शामिल है। इसके शुरू होने के बाद लोगों को लंबी दूरी तय करने में काफी कम समय लगेगा और शहर के प्रमुख मार्गों पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी।
तीसरे और चौथे चरण पर 1220 करोड़ रुपये खर्च होंगे
कार्यक्रम के दौरान परियोजना के तीसरे और चौथे चरण के निर्माण कार्यों की आधारशिला भी रखी जाएगी। इन दोनों चरणों के विकास पर लगभग 1220 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत 1090 चौराहे से लेकर शहीद पथ तक फ्लाईओवर, चार लेन सड़क और बंधे का निर्माण किया जाएगा। वहीं, आईआईएम से किसान पथ तक पूरे कॉरिडोर को विकसित करने के लिए करीब 7000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है।
यात्रा समय में होगी बड़ी कमी, 15 लाख लोगों को लाभ
ग्रीन कॉरिडोर बनने से शहर में आवागमन काफी तेज हो जाएगा। पहले आईआईएम से हजरतगंज और गोमतीनगर पहुंचने में करीब एक घंटा लग जाता था, लेकिन कॉरिडोर शुरू होने के बाद यह दूरी लगभग 20 मिनट में तय की जा सकेगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, इस परियोजना के शुरू होने से करीब 15 लाख लोगों को सीधा फायदा मिलेगा और शहर में ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।
पेड़ों को काटने के बजाय किया गया ट्रांसप्लांट
ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण के दौरान पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है। परियोजना के रास्ते में आने वाले करीब 166 बड़े पेड़ों को काटने के बजाय उनका ट्रांसप्लांट कराया गया। एलडीए सचिव विवेक श्रीवास्तव के अनुसार सभी पेड़ों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है और वे अब भी जीवित हैं।
पाम के पेड़ों को हटाकर लगाए गए नए पौधे
ग्रीन कॉरिडोर के बीरबल साहनी मार्ग पर पहले पाम के पेड़ लगाए गए थे, जिन्हें होली से पहले लगाया गया था। हालांकि बाद में इन्हें हटा दिया गया और उनकी जगह वन विभाग द्वारा दूसरे उपयुक्त पौधे लगाए गए। अधिकारियों के मुताबिक ये पाम के पेड़ दरअसल म्यूजियम परिसर में लगाए जाने थे, लेकिन गलती से यहां लगा दिए गए थे।
2024 में शुरू हुआ था पहला चरण
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का पहला चरण 11 मार्च 2024 को शुरू किया गया था। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बने इस चरण में 6.8 किलोमीटर लंबा पुल आईआईएम रोड से पक्का पुल तक बनाया गया था। वहीं डालीगंज के बीच का हिस्सा अभी निर्माणाधीन है और 1090 चौराहे से लामार्ट होते हुए शहीद पथ तक के हिस्से पर भी काम तेजी से चल रहा है।










