मध्य प्रदेश में मार्च महीने में ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन अब मौसम में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के कई हिस्सों में 14 और 15 मार्च को बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। यह बदलाव एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण हो रहा है, जिससे लोगों को तेज गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।
वर्तमान में प्रदेश के कई जिले, विशेषकर नर्मदापुरम और दमोह, 36 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी तापमान 32 से 34 डिग्री के बीच बना हुआ है। हालांकि, 13 मार्च की रात से मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है।
इन जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 14 और 15 मार्च को प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में मौसम सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। विभाग ने कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।
ऑरेंज अलर्ट: छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में कुछ स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही, गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि की भी प्रबल संभावना है।
येलो अलर्ट: डिंडोरी, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, दमोह, सागर, नर्मदापुरम, बैतूल और रायसेन जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने का अनुमान है।
क्यों बदल रहा है मौसम का मिजाज?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बदलाव के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में सक्रिय हो रहा है। दूसरा, दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण तंत्र बना हुआ है। इन दोनों सिस्टमों के प्रभाव से अरब सागर से नमी आ रही है, जो मध्य प्रदेश के मौसम को प्रभावित करेगी।
इस मौसमी गतिविधि का असर 13 मार्च की रात से ही दिखने लगेगा और 14-15 मार्च को इसका प्रभाव चरम पर रहेगा। इसके बाद 16 मार्च से मौसम फिर से साफ होने की उम्मीद है।
किसानों की बढ़ी चिंता
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की इस चेतावनी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस समय खेतों में गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें कटाई के लिए तैयार खड़ी हैं या कटाई चल रही है। ऐसे में तेज हवा, बारिश और ओले फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। प्रशासन ने किसानों को सतर्क रहने और अपनी फसलों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक उपाय करने की सलाह दी है।











