वाराणसी में हरित क्रांति का महाआरंभ, सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में 60 घाटों की थीम पर 3 लाख पौधों से सजेगा शहरी वन

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By Pinal PatidarPublished On: March 1, 2026

धार्मिक नगरी वाराणसी अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने जा रही है। नगर निगम द्वारा सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में 350 बीघा भूमि पर विकसित आधुनिक ‘शहरी वन’ का भव्य शुभारंभ रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। प्रदेश के वित्त मंत्री Suresh Khanna ने मौके पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘ऑक्सीजन बैंक’ बताया। निरीक्षण के दौरान महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना की संरचना समझाई।

तीन लाख पौधों का एक साथ रोपण, गिनीज रिकॉर्ड की तैयारी

1 मार्च को एक ही दिन में तीन लाख से अधिक पौधों का रोपण कर नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को दर्ज करने के लिए Guinness Book of World Records की टीम भी वाराणसी पहुंच चुकी है। दोपहर ढाई बजे मुख्यमंत्री वृक्षारोपण कार्यक्रम की प्रस्तुति देखेंगे और प्रमाणपत्रों का वितरण करेंगे। पूरे वन क्षेत्र को 60 सेक्टरों में बांटा गया है, जिनका नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों—दशाश्वमेध, ललिता घाट, केदार घाट, चौशट्टी घाट, मानमंदिर घाट और शीतला घाट—के नाम पर रखा गया है। प्रत्येक सेक्टर में लगभग पांच हजार पौधे लगाए जाएंगे।

गंगा तट पर विकसित होगा ‘मिनी काशी’ का हरित स्वरूप

यह परियोजना केवल हरियाली बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि गंगा किनारे एक हरे-भरे ‘मिनी काशी’ का रूप भी प्रस्तुत करेगी। यहां आम, अमरूद, पपीता जैसे फलदार वृक्षों के साथ अश्वगंधा, शतावरी और गिलोय जैसी औषधीय प्रजातियां भी लगाई जाएंगी। फूलों की खेती में गुलाब, चमेली और पारिजात से राजस्व मॉडल तैयार किया गया है। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ समझौते के तहत तीसरे वर्ष से नगर निगम को दो करोड़ रुपये वार्षिक आय होने की संभावना है, जो सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

मियावाकी तकनीक और आधुनिक सिंचाई से होगा संरक्षण

तीन लाख पौधों को सुरक्षित और विकसित करने के लिए मियावाकी पद्धति अपनाई गई है, जिसे जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी ने विकसित किया था। इस तकनीक से कम जगह में घने और देशी जंगल तेजी से उगाए जा सकते हैं, और पौधों की वृद्धि सामान्य से 10 गुना अधिक तेज होती है। सिंचाई के लिए 10,827 मीटर लंबी पाइपलाइन, 10 बोरवेल और 360 रेन गन सिस्टम लगाए गए हैं। मिट्टी संरक्षण के लिए शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस सहित 27 देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है। पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए वन क्षेत्र में चार किलोमीटर लंबा पाथवे भी तैयार किया गया है, जो इसे पर्यावरण और पर्यटन दोनों दृष्टि से खास बनाएगा।