मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट का स्वरूप तेजी से बदला जा रहा है। लंबे समय से जारी विस्तार और नवीनीकरण परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने यात्री सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आधारभूत संरचना को आधुनिक रूप देने का काम तेज कर दिया है। टर्मिनल भवन के अंदर और बाहर कई नई व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, जिससे यात्रियों को अधिक सुव्यवस्थित और आरामदायक अनुभव मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है और जल्द ही इसे संचालन के लिए तैयार कर लिया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था हुई और मजबूत
पुराने टर्मिनल में तीन नई अत्याधुनिक एक्स-रे मशीनें स्थापित की गई हैं। इन मशीनों के माध्यम से यात्रियों के सामान की स्कैनिंग अधिक तेजी और सटीकता से की जा सकेगी। नई प्रणाली लागू होने के बाद यात्री सुरक्षा जांच पूरी करते ही सीधे चेक-इन काउंटर की ओर बढ़ सकेंगे, जिससे अनावश्यक भीड़ और लंबी कतारों से राहत मिलेगी। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए पूरे टर्मिनल क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था भी सुदृढ़ की जा रही है।
एयरलाइंस कार्यालय आवंटन की प्रक्रिया शुरू
टर्मिनल के नवीनीकरण के साथ ही एयरलाइंस कंपनियों को कार्यालय आवंटित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि संचालन शुरू करने की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। एयरपोर्ट प्रशासन ने 1 अप्रैल से इस टर्मिनल से उड़ानों का संचालन प्रारंभ करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यहां से मुख्य रूप से ATR विमान संचालित किए जाएंगे। वर्तमान में इंदौर एयरपोर्ट से प्रतिदिन लगभग 36 ATR उड़ानें संचालित होती हैं, जिन्हें नए टर्मिनल पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है।
बढ़ेगी सालाना यात्री क्षमता
एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार 15 मार्च के बाद सुरक्षा एजेंसियां अंतिम निरीक्षण करेंगी। सभी सुरक्षा और तकनीकी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही संचालन की औपचारिक मंजूरी दी जाएगी। पुराने और नए दोनों टर्मिनलों के संयुक्त उपयोग से एयरपोर्ट की वार्षिक यात्री क्षमता बढ़कर लगभग 55 लाख तक पहुंच जाएगी। इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, भीड़ का दबाव कम होगा और यात्रा अनुभव अधिक सहज बनेगा।
एप्रोच रोड और बाहरी सुविधाओं का विकास
एयरपोर्ट परिसर में नई एप्रोच रोड का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है, जिससे यातायात सुगम होगा। इसके अलावा पार्किंग, प्रवेश और निकास व्यवस्था को भी व्यवस्थित किया गया है। समग्र रूप से यह परियोजना इंदौर के हवाई ढांचे को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे शहर को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हवाई संपर्क में और मजबूती मिलेगी।










