एमपी में अवैध कॉलोनियों पर सख्ती की तैयारी, तीन माह में नया सख्त कानून, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई का ऐलान, मंत्री विजयवर्गीय का बड़ा बयान

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By Pinal PatidarPublished On: February 27, 2026
Kailash Vijayvargiya

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के 10वें दिन अवैध कॉलोनियों का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस विषय को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े किए, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। पूरे सत्र के दौरान यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहा।

जयवर्धन सिंह के आरोपों से गरमाया सदन

कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक जयवर्धन सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैल रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई बिल्डर बिना वैध अनुमति के कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं और उन्हें उच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त है। उनके मुताबिक प्रशासन की ढिलाई और निगरानी की कमी के कारण अवैध निर्माण बेखौफ जारी है, जिससे आम लोगों को भविष्य में कानूनी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

सत्ता पक्ष की सफाई और कड़े कानून का ऐलान

सरकार की ओर से नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मोर्चा संभाला। उन्होंने स्वीकार किया कि अवैध कॉलोनियां एक गंभीर चुनौती बन चुकी हैं, लेकिन सरकार इस पर सख्त रुख अपनाने जा रही है। मंत्री ने घोषणा की कि अगले तीन महीनों में एक कड़ा और प्रभावी कानून लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य अवैध कॉलोनियों के निर्माण और विस्तार पर पूरी तरह लगाम लगाना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषी कॉलोनाइजरों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रीति पाठक के सवाल से बढ़ी चर्चा

सदन में इस मुद्दे पर भाजपा विधायक रीति पाठक ने भी अपनी ही सरकार से सवाल पूछा, जिससे चर्चा और व्यापक हो गई। उन्होंने जानना चाहा कि अवैध कॉलोनियों पर अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई है और भविष्य की रणनीति क्या होगी। इस पर मंत्री विजयवर्गीय ने दोहराया कि सरकार समस्या को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही ठोस परिणाम जमीन पर दिखाई देंगे।

नए कानून की रूपरेखा और कार्रवाई का दावा

मंत्री ने संकेत दिया कि प्रस्तावित कानून में अवैध कॉलोनियों के निर्माण में शामिल कॉलोनाइजरों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी बिना वैध अनुमति के कॉलोनी विकसित करने की हिम्मत न कर सके। सरकार का दावा है कि यह कानून एक मिसाल साबित होगा और अवैध निर्माण की प्रवृत्ति पर निर्णायक प्रहार करेगा।

जहां लोग बस चुके, वहां मानवीय दृष्टिकोण

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन कॉलोनियों में बड़ी संख्या में लोग पहले से रह रहे हैं और जिन्हें तकनीकी रूप से वैध किया जा सकता है, उन्हें नियमित (रेगुलराइज) करने पर विचार किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि आम नागरिकों को बेवजह परेशान न होना पड़े। वहीं, जो कॉलोनियां पूरी तरह से नियमों के विपरीत हैं और वैध नहीं हो सकतीं, उनके संबंध में नीतिगत निर्णय लेकर संतुलित समाधान तलाशने की बात कही गई है।

राजनीतिक बहस के बीच बड़ा संदेश

अवैध कॉलोनियों का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप ले चुका है। जहां विपक्ष सरकार पर संरक्षण और लापरवाही के आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार सख्त कानून लाकर व्यवस्था सुधारने का दावा कर रही है। आने वाले महीनों में प्रस्तावित कानून की वास्तविक प्रभावशीलता ही तय करेगी कि प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के मकड़जाल पर कितनी प्रभावी रोक लग पाती है।