एमपी में शिक्षकों पर कड़ा नियम, 7 दिन शिक्षक ने छुट्टी की तो जाएगी नौकरी, शिक्षा विभाग की सख्ती के पीछे जानें वजह

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By Pinal PatidarPublished On: February 26, 2026

प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की लगातार गैरहाजिरी को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) द्वारा जारी नए निर्देशों के तहत अब बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहने वाले शिक्षकों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि बार-बार अनुपस्थित रहने की प्रवृत्ति से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है और स्कूलों की व्यवस्था प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अनुशासन को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है।

7 दिन लगातार अनुपस्थित रहने पर सेवा समाप्ति का प्रावधान

नए आदेश के अनुसार यदि कोई शिक्षक लगातार सात दिन तक बिना पूर्व सूचना या स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक शिक्षक को अपनी अनुपस्थिति की सूचना संबंधित अधिकारी को देना अनिवार्य होगा। यदि किसी शिक्षक की गैरमौजूदगी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है, तो इसकी जवाबदेही भी तय की जाएगी। इस सख्त नियम से शिक्षा तंत्र में जिम्मेदारी और पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

शिक्षा मंत्री का स्पष्ट संदेश

स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा है कि विभाग में अनुशासन सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि हर व्यवस्था की अपनी मर्यादा होती है और यदि शिक्षक ही अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करेंगे तो छात्रों का भविष्य सुरक्षित नहीं रह पाएगा। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही या मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शिकायतों के बाद लिया गया निर्णय

सूत्रों के अनुसार कई जिलों से लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ शिक्षक नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इससे सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ रहा था और अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा था। विभाग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सख्त आदेश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि जो शिक्षक ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे, उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा, लेकिन लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

सरकार के इस कदम को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब देखना होगा कि इस सख्ती का जमीनी स्तर पर कितना असर पड़ता है और विद्यालयों में उपस्थिति तथा पढ़ाई की गुणवत्ता में कितना सुधार आता है। फिलहाल शिक्षा विभाग ने साफ संदेश दे दिया है कि ड्यूटी से गायब रहना अब महंगा साबित होगा।