मध्यप्रदेश में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं और प्रोत्साहन घोषणाएं कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में कृषि क्षेत्र को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से ठोस नीतियां बनाई जा रही हैं। विशेष रूप से चना, मसूर, तुअर सहित दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य और स्थिर आय मिल सके।
उड़द पर बोनस का बड़ा ऐलान, फसल विविधीकरण को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि प्रत्येक किसान को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मूंग की बजाय उड़द की बुवाई करें, जिससे उत्पादन संतुलन बना रहे और बाजार में बेहतर कीमत मिल सके। साथ ही सरसों की फसल को भी भावांतर भुगतान योजना के दायरे में लाने की तैयारी है, ताकि समर्थन मूल्य से कम दाम मिलने पर किसानों को अंतर राशि का भुगतान किया जा सके।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य, बच्चों को मिलेगा पोषण
किसान प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने की रणनीति बनाई गई है। उनका कहना है कि दूध उत्पादन में वृद्धि से किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित होगी और बच्चों के पोषण स्तर में भी सुधार आएगा। इसी दिशा में सरकार ने आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, ताकि स्कूल स्तर पर पोषण अभियान को मजबूती मिल सके।
अन्नदाता से ऊर्जादाता और फिर उद्यमी बनाने की पहल
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों को केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें ऊर्जा उत्पादक और आगे चलकर उद्यमी बनाने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले तीन वर्षों में एक लाख किसानों को सोलर पावर पंप प्रदान किए जाएंगे। इससे सिंचाई की लागत कम होगी और किसान अतिरिक्त बिजली उत्पादन कर उसे बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा, स्थानीय स्तर पर मिलेगा उचित दाम
किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और फूड पार्कों का विस्तार किया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी फसल का मूल्य स्थानीय स्तर पर ही बेहतर मिल सकेगा और उन्हें दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस और सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने जैसे फैसले सरकार की व्यापक किसान हितैषी रणनीति का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करना और कृषि को लाभकारी व्यवसाय में बदलना है।










