MP Weather : अगले 48 घंटों में एमपी के इन जिलों में होगी बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

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By Raj RathorePublished On: January 26, 2026
MP Weather

MP Weather : मध्य प्रदेश में हाड़ कंपाने वाली ठंड के बीच अब मौसम का एक नया मिजाज देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रदेश के कई हिस्सों में आगामी दिनों में ‘मावठा’ गिर सकता है।

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 26 जनवरी से एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित करने जा रहा है। इस भौगोलिक बदलाव का सीधा असर मध्य प्रदेश के वायुमंडल पर पड़ेगा, जिससे अगले दो से तीन दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश की स्थिति बनी रहने का अनुमान है।

पश्चिमी विक्षोभ का असर

मौसम विभाग के मुताबिक, यह पश्चिमी विक्षोभ काफी सक्रिय है और इसके प्रभाव से अरब सागर से आने वाली नमी मध्य प्रदेश के उत्तरी और मध्य भागों में बादलों का डेरा जमाएगी।

विशेष रूप से ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग के जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की जा सकती है। 26 जनवरी की शाम से ही आसमान में बादलों की आवाजाही शुरू हो जाएगी और 27 जनवरी को बारिश की तीव्रता अधिक रहने की संभावना है।

इन जिलों में होगी बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, 27 जनवरी को भोपाल,रतलाम, उज्जैन, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, अशोकनगर, शिवपुरी, विदिशा, दतिया, शाजापुर, आगर, नीमच, निवाड़ी, छतरपुर, सागर, गुना, राजगढ़, मंदसौर और टीकमगढ़ में बारिश होने की संभावनाएं है।

वहीं 28 जनवरी को जबलपुर, नरसिंहपुर, विदिशा, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, रायसेन, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सिंगरौली, मैहर, शहडोल, उमरिया, कटनी, दमोह, सागर, सतना और रीवा में बारिश का अलर्ट है।

फसलों पर प्रभाव

सर्दियों के मौसम में होने वाली इस बारिश को स्थानीय भाषा में ‘मावठा’ कहा जाता है। रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं के लिए यह बारिश अमृत मानी जाती है, लेकिन इसमें एक बड़ा जोखिम भी छिपा है। यदि बारिश के साथ ओलावृष्टि होती है, तो सरसों और दलहनी फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान मौसम के इस पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए अपनी फसलों की सिंचाई और कीटनाशकों के छिड़काव का समय तय करें।

तापमान में उतार-चढ़ाव

वर्तमान में प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान 5 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। बारिश के आने से पहले रात के तापमान में मामूली बढ़ोतरी देखी जा सकती है क्योंकि बादलों की वजह से ‘ग्रीनहाउस प्रभाव’ पैदा होता है।

हालांकि, जैसे ही बारिश का दौर थमेगा और आसमान साफ होगा, उत्तर भारत के पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं एक बार फिर ठिठुरन बढ़ाएंगी। फरवरी की शुरुआत में कड़ाके की ठंड का एक और दौर आने की पूरी संभावना है।

पिछले वर्षों का संदर्भ

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी जनवरी के अंतिम सप्ताह में इसी तरह की मौसमी हलचल देखी गई थी। तब भी पश्चिमी विक्षोभ के कारण मालवा और बुंदेलखंड अंचल में बेमौसम बारिश हुई थी, जिससे फसलों को आंशिक नुकसान हुआ था।

इस बार भी मौसम का पैटर्न लगभग वैसा ही नजर आ रहा है। मौसम विभाग लगातार उपग्रह चित्रों के माध्यम से विक्षोभ की गति पर नजर रख रहा है ताकि समय रहते सटीक जानकारी साझा की जा सके।