Indore Contaminated Water : शहर में पानी से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए शुरू की गई नगर निगम की ‘जल सुनवाई’ पहल दूसरे ही हफ्ते में दम तोड़ती नजर आ रही है। मंगलवार को हुई दूसरी सुनवाई में शिकायतों का आंकड़ा तेजी से गिरा, जो इस कार्यक्रम के प्रति आम जनता के मोहभंग का स्पष्ट संकेत है।
पहले सप्ताह की सुनवाई में जहां 309 शिकायतें दर्ज की गई थीं, वहीं इस मंगलवार को यह संख्या 100 से भी कम रह गई। इस भारी गिरावट को समस्याओं के समाधान के बजाय लोगों के घटते भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरे हफ्ते में ही खाली हुए काउंटर
प्रशासन ने बड़े स्तर पर जल सुनवाई की शुरुआत की थी, ताकि पेयजल, सीवरेज और दूषित पानी जैसी समस्याओं का मौके पर ही निपटारा किया जा सके। लेकिन मंगलवार को आयोजित दूसरी सुनवाई में शिकायत केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा और गिने-चुने लोग ही अपनी परेशानियां लेकर पहुंचे।
जो कुछ लोग पहुंचे, उनका कहना था कि उनकी समस्याएं सालों पुरानी हैं और अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिला है।
समस्या दूषित पानी, समाधान नदारद
शिकायत करने पहुंचे इक्का-दुक्का लोगों ने बताया कि वे लंबे समय से नलों में आने वाले दूषित पानी से परेशान हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
“सालों से नलों में गंदा पानी आ रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। अब इन सुनवाइयों से भी कोई उम्मीद नहीं बची है।” — स्थानीय निवासी
लोगों में इस बात को लेकर निराशा है कि सुनवाई केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है। जब तक पुरानी और गंभीर समस्याओं का स्थायी हल नहीं निकाला जाता, तब तक ऐसी पहलों पर विश्वास करना मुश्किल है। प्रशासन के लिए यह गिरावट एक चेतावनी है कि केवल कार्यक्रम शुरू करना ही काफी नहीं है, बल्कि जनता का विश्वास जीतना भी जरूरी है।











