आज बसंत पंचमी अर्थात श्री पंचमी है। पूरे देश भर में बसंत पंचमी के त्यौहार को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन का बेहद खास महत्व होता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर ज्ञान, विद्या, कला, साहित्य और संगीत की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था। बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। इसके बाद से सर्दियां आहिस्ता आहिस्ता समाप्त होने लगती है। बसंत पंचमी तिथि एक अबूझ मुहूर्त होती है जिसमें किसी भी शुभ कार्य को बिना मुहूर्त के किया जा सकता है। बसंत पंचमी पर विद्यारंभ करने की प्रथा होती है। वसंत पचंमी के दिन मां सरस्वती की विधि-विधान की पूजा और मंत्रों का जाप करना शुभ और विशेष फलदायी होता है।

हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रम्हांड के रचयिता भगवान ब्रह्मा के मुख से बसंत पंचमी के दिन ही ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था.बसंत पंचमी हर वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. बसंत पंचमी का त्यौहार 26 जनवरी को बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा. इसी दिन से बसंत ऋतु का आगमन हो जाता है. बसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है. इसके बाद से ही कड़कड़ाती सर्दी से राहत मिलने लगती है.

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यह फेस्टिवल पूरे उत्तर भारत में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. किसानों के लिए इस पर्व का विशेष महत्‍व होता है. बसंत पंचमी पर सरसों के खेत लहलहा उठते हैं. चना, जौ, ज्‍वार और गेहूं की बालियां ख‍िलने लगती हैं. बसंत पंचमी के दिन से ही मौसम सुहाना हो जाता है और पेड़-पौधों में नए फल-फूल आने लगते हैं. इस दिन कई स्थानों पर पतंगबाजी भी की जाती है.

बसंत पंचमी के दिन ही व‍िद्या की देवी मां सरस्‍वती प्रकट हुई थी. इसलिए इस दिन सरस्‍वती देवी की उपासना करने का भी व‍िधान है. इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की जाती है.

बसंत पंचमी पूजा शुभ मुहूर्त 2023

हिंदू पंचांग के मुताबिक माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्यौहार माना जाता है। इस बार पंचमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से हो रही है। ये तिथि 26 जनवरी को प्रातः काल 10 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार बसंत पंचमी 26 जनवरी को ही बड़े ही धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 07 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त है।

बसंत पंचमी पर बना शुभ योग

बसंत पंचमी पर ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा और शुभ कार्य के लिए बेहद ही शुभ दिन माना जाता है। इस बार बसंत पचंमी पर बहुत ही शुभ योग बन रहा है। बसंत पंचमी के दिन शिव,गजकेसरी, हर्ष और शुभकर्तरी नाम के शुभ योग बन रहे हैं। इसके अतिरिक्त इस दिन देवगुरु बृहस्तपति और शनि अपनी-अपनी खुद की राशि में मौजूद रहेंगे। गुरु मीन राशि और शनि कुंभ राशि में है।

ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा

बसंत पंचमी के पावन पर्व पर विद्यार्थियों और कलाकारों के द्वारा मां सरस्वती की खास पूजा आरधना और उपासना की जाती है। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद सफेद अथवा पीले वस्त्र धारण कर विधिपूर्वक कलश स्थापना करें । मां सरस्वती के साथ भगवान गणेश , सूर्यदेव , भगवान विष्णु व शिवजी की भी पूजा अर्चना करें । श्वेत फूल-माला के साथ माता को सिन्दूर व अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करें । बसंत पंचमी के दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती के पवित्र चरणों पर गुलाल भी अर्पित करने का विधान बताया गया है. प्रसाद में मां को पीले रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं ।