जीएसटी विषय पर हुआ सेमिनार, नई दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ने किया संबोधित

सरकार द्वारा जी एस टी के अंतर्गत आने वाली परेशानियों के समाधान के लिए एक बहुत ही अच्छी व्यवस्था `एडवांस रूलिंग" के रूप में की गयी है। इसके अंतर्गत, करदाता कुछ विशिष्ट मामलो में आवेदन लगाकर स्पष्टीकरण प्राप्त कर सकते है।

टैक्स प्रैक्टिश्नर्स एसोसिएशन एवं इंदौर सीए ब्रांच ने संयुक्त रूप से “जीएसटी अनुपालन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयां” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया जिसे नई दिल्ली से पधारे प्रसिद्द सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट जे के मित्तल ने सम्बोधित किया। एडवोकेट जे के मित्तल ने कहा कि सरकार द्वारा जब जी एस टी लागू किया था तब सभी की यह अपेक्षा थी कि इस नयी कर प्रणाली से, कर सम्बंधित विवादों में कमी आएगी और करदाता को उसके द्वारा चुकाए गए कर का क्रेडिट (इनपुट टैक्स क्रेडिट) बहुत आसानी से मिलेगा। लेकिन जी एस टी कानून अपने मूल रूप से भटककर करदाताओं के लिए नित नयी परेशानी खड़ी कर रहा है।

वक्ता जे के मित्तल ने कहा कि सरकार द्वारा जी एस टी के अंतर्गत आने वाली परेशानियों के समाधान के लिए एक बहुत ही अच्छी व्यवस्था `एडवांस रूलिंग” के रूप में की गयी है। इसके अंतर्गत, करदाता कुछ विशिष्ट मामलो में आवेदन लगाकर स्पष्टीकरण प्राप्त कर सकते है। लेकिन चूँकि यह स्पष्टीकरण विभाग के अधिकारीयों द्वारा ही दिया जाता है अतः ज्यादातर मामलों में अधिकारी द्वारा सावधानी रखते हुए सरकार के पक्ष को ध्यान रखते हुए ही आदेश जारी किये जाते है। इस कारण से इसकी बहुत ज्यादा उपयोगिता नहीं रह गयी है एवं इससे बहुत सारे नए विवाद खड़े हो रहे है।

अधिकारीयों द्वारा बड़ी संख्या में जारी किये जाने वाले सम्मन (summon) की बात करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार सम्मन कुछ विशेष परिस्तिथियों में ही जारी किया जा सकता है परन्तु अधिकारीयों द्वारा बिना उचित कारण दर्शाये, धड़ल्ले से सम्मन जारी किये जा रहे है। सम्मन के द्वारा करदाताओं को जानकारी देने या वक्तव्य देने के लिए व्यक्तिगत रूप से बुलाया जाता है जिसके कारण करदाताओं में भय का माहौल उत्पन्न होता है।

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उन्होंने प्रत्यक्ष कर (आयकर ) से जी एस टी की तुलना करते हुए कहा कि आयकर में कर अपवंचन की सम्भावना के बावजूद बहुत कम जांच (स्क्रूटिनी) की जाती है जबकि इस अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में सम्बंधित कर अधिकारी के अलावा बहुत सारे विभाग जैसे प्रिवेंटिव, डी जी जी आई , ऑडिट द्वारा भी जांच की जाती है। जिसके कारण करदाता स्वयं को परेशान महसूस कर रहा है। शहर के बाहर के अधिकारीयों द्वारा जारी किये जाने वाले सम्मन के समबन्ध में उन्होंने बताया की cpc के अंतर्गत वाहन उपलब्ध होने की दशा में शहरी सीमा से २०० मील (करीब ३२० km ) एवं वाहन उपलब्ध नहीं होने की दशा में ५० मील (करीब ८० km ) की दुरी तक के लिए व्यक्तिगत रूप से बुलाया जा सकता है।

सर्च की दशा में उन्होंने बताया की सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देश जारी किये गए है कि सम्बंधित विभाग में सी सी टीवी कैमरा लगाए जाए एवं इसकी रिकॉर्डिंग ६ माह तक रखी जाए । इससे करदाताओं को विभागीय अधिकारीयों के नाज़ायज़ तरीको से की जाने वाली पूछताछ से मुक्ति मिलेगी। जी एस टी के अंतर्गत आने वाली विभिन्न परेशानियों पर विस्तृत में चर्चा करते हुए उन्होंने सभी टैक्स प्रोफेशनल्स को केस को बारीकी से समझने एवं बेहतर ढंग से अपना पक्ष रखने की बात कही।

कार्यक्रम की शुरुआत में टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सी ए शैलेन्द्र सोलंकी ने कहा कि जी एस टी के अंतर्गत एक व्यापारी, सरकार के लिए टैक्स वसूलकर सरकारी खजाने में जमा कराता है। एक एजेंट के रूप में कार्य करने के बावजूद उसके लिए बहुत सारे रिकॉर्ड रखकर समय पर कर भुगतान का दबाव रहता है। जी एस टी के अंतर्गत जरा सी चूक पर ब्याज एवं पेनल्टी के बहुत ही कड़े नियम है ! सरकार को चाहिए कि सामान्य व्यापारी को विश्वास में लेते हुए कर अपवंचन में लिप्त व्यपारियों पर ही कार्यवाही करे।

सी ए अभय शर्मा द्वारा उपस्थित कर सलाहकारों को किसी भी प्रकार की समस्या होने पर सुझाव देते हुए कहा की इसे बड़े अधिकारीयों के सज्ञान में लाना चाहिए। कार्यक्रम में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की इंदौर शाखा के सचिव रजत धानुका, पी डी नागर, एस एन गोयल, आर एस गोयल जे पी सराफ, अजय सामारिआ, विकास गुरु, नवीन खंडेलवाल एवं बड़ी संख्या में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स , कर सलाहकार एवं अधिवक्ता उपस्थित हुए ! कार्यक्रम सञ्चालन टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के सचिव सी ए कृष्ण गर्ग ने एवं आभार प्रदर्शन सी ए सुनील पी जैन ने किया !