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यंग इंटरप्रेन्योर मनिष डबकारा ने स्टार्टअप से खड़ी कर दी 15 करोड़ की कंपनी

Posted on: 06 Jun 2018 08:19 by Praveen Rathore
यंग इंटरप्रेन्योर मनिष डबकारा ने स्टार्टअप से खड़ी कर दी 15 करोड़ की कंपनी

इंदौर। आज से एक दशक पहले की बात करें तो क्या किसी ने सोचा था कि कार्बन क्रेडिट भी एक कमोडिटी की तरह बिक सकती है और इसको प्रोफेशन बनाया जा सकता है? आपका जवाब शायद ना होगा, लेकिन इंदौर के यंग इंटरप्रेन्योर ने अपने करियर की शुरुआत ही 21वीं सदी की इस नई कमोडिटी यानि कार्बन क्रेडिट से की। घमासान डॉटकॉम ने कार्बन उत्सर्जन रोकने और ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए काम कर रही कंपनी एनकिंग इंटरनेशनल के एमडी मनिष डबकारा से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश…

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सवाल : आपकी कंपनी के बारे में विस्तार से बताइए?
जवाब : एनकिंग इंटरनेशनल क्लीन एनर्जी प्रोड्यूसर तथा एनर्जी एफिशिएंट कैंपेन (ऊर्जा उत्पादक तथा ऊर्जा कुशल कंपनियों) की सहायता के लिए कार्यरत है, जो उनके कार्बन फुटप्रिंट (वायु उत्सर्जन) को नियत करके, उन कंपनियों के कार्बन क्रेडिट्स को बेचकर अतिरिक्त राजस्व अर्जित करता है। एनकिंग इंटरनेशनल भारत की सबसे बड़ी कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट डेवलपर और सप्लायर है। एनकिंग इंटरनेशनल निजी व शासकीय संस्थानों को आईएसओ तथा ज़ेडईडी मानकों को अमल में लाने में भी मदद करता है।

सवाल : आपकी कंपनी कार्बन क्रेडिट से रेवेन्यू जनरेट करने का काम कर रही है, इसमें कैसे कमाई हो सकती है और आपको इस बिजनेस का आइडिया कैसे आया?
जवाब : मैंने एमटेक तक पढ़ाई की, ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर काफी कुछ पढ़ा, अध्ययन किया। उसके बाद इसी क्षेत्र की एक ऑडिट करने वाली कंपनी में नौकरी भी की। उसके बाद मुझे लगा कि कार्बन उत्सर्जन को लेकर भारत में अभी भले ही जागरूकता नहीं है, लेकिन 2021 तक ये भारत में लागू हो जाएगा। दुनिया के लगभग सभी देश इसे लागू करने को तैयार है। खास बात ये है कि कार्बन क्रेडिट को सेल कर आने वाले वर्षों में इससे कमाई भी की जा सकती है। जैसे बिजली बनाने के लिए सौर और पवन उर्जा में कम कार्बन उत्सर्जन होता है जबकि कोयला आधारित बिजली उत्पादन में ज्यादा कार्बन उत्सर्जन होता है। इसके अलावा टेक्सटाइल्स, आटोमोबाइल या फिर स्टील प्लांट सभी में कार्बन उत्सर्जन होता ही है, इसे कम करके कार्बन क्रेडिट ले सकते हैं और इस कार्बन क्रेडिट को इंटरनेशनल मार्केट में बेच कर अपने बिजनेस में अतिरिक्त रेवेन्यू जुटा सकते हैं। दुनियाभर में ग्लोबल वार्मिंग के लिए काम हो रहा है।

सवाल : आपने एनकिंग इंटरनेशनल की शुरुआत कब की?
जवाब : हमने शुरुआत 2008 में एक छोटी सी कंपनी के रूप में की। उस वक्त बहुत ज्यादा पूंजी भी नहीं थी। महज डेढ़ लाख रुपए लगाकर अपना बिजनेस शुरू किया। एक तरह से आप इसे स्टार्टअप कह सकते हैं। हमने सबसे पहले पीथमपुर की टेक्सटाइल कंपनी प्रतिभा सिंथेटिक्स को कार्बन क्रेडिट बेचे। यानी हमने शुरुआत भी इंदौर से ही की और हमारा पहले क्लाइंट भी इंदौर की कंपनी बनी। हालांकि इन आठ-दस सालों में हमने काफी प्रोग्रेस भी की है। आज एनकिंग इंटरनेशनल के पास 40 से अधिक देशों में 800 से भी अधिक का क्लाइंट बेस है। पिछले वर्ष कंपनी का टर्न ओवर १५ करोड़ रुपए हो गया है।

सवाल : आपको इसे प्रोफेशन के रूप में अपनाने का आइडिया कैसे आया?
जवाब : मैंने एमटेक किया है। इस विषय को पढ़ा है, इसमें संभावनाएं दिखी, इसलिए प्रोफेशन के रूप में अपना लिया। हालांकि अभी भारत में इसको लेकर जागरूकता की कमी है। म.प्र. में हमारी एक मात्र कंपनी है, वहीं भारतवर्ष की बात करें तो करीब चालीस कंपनियां होंगी।

सवाल : कार्बन क्रेडिट कौन जारी करता है, आपकी कंपनी की भूमिका क्या होती है?
जवाब : यूनाइटेड नेशन जर्मनी से कार्बन क्रेडिट इशू होते हैं। हमारी कंपनी का काम अपने क्लाइंट के लिए कार्बन क्रेडिट बेचना होता है, उसके लिए क्लाइंट खोजना होता है। दरअसल ये एक बहुत बड़ा मार्केट हैं। अब तक हम दुनिया के चालीस देशों में अपना क्लाइंट बैस बना चुके हैं।

सवाल : आपने एजुकेशन कहां से किया?
जवाब : मेरी प्रारंभिक शिक्षा महू और उच्च शिक्षा इंदौर व भोपाल में हुई।

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