Breaking News

आपको बीमार कर रहे हैं शीशे से बंद घर और दफ्तर

Posted on: 04 Jun 2018 08:50 by Mohit Devkar
आपको बीमार कर रहे हैं शीशे से बंद घर और दफ्तर

शहरों में बढ़ते फ्लैट कल्चर के कारण अब आंगन वाले घर काम ही देखने को मिलते हैं. फ्लैट में रहना बेशक आधुनिक जीवनशैलीका हिस्सा हो, लेकिन शायद आप नहीं जानतें के यह आपको बीमार करता हैं. हाल ही में की गई एक रिसर्च के मुताबिक, बंद घरों में रहना या बंद ऑफिस में काम करना बेशक आरामदायक होता है, लेकिन यह हमारी हड्डियों के लिए बेहद नुकसानदायक हैं. इससे हड्डियां कमज़ोर होती हैं. बंद घरों में रहने के कारण हमारे शरीर को परियाप्त धुप नहीं मिल पाती. धूप न मिलने से शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है, जो हड्डियों के साथ-साथ, पाचन क्रिया को भी प्रभावित करती है.

Image result for flat in mumbai

via

बंद घर में रहने का एक सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि हमें ताजी हवा नहीं मिल पाती. इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. भारत में धूप की कोई कमी नहीं है, फिर भी लगभग 65 से 70 प्रतिशत भारतीयों में विटामिन डी की कमी है. यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एक अध्ययन के मुताबिक, विटामिन डी की कमी से डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शोध के अनुसार, अवसाद के मामलों में दस साल में 18 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.

Image result for sunlight in the house

via

 

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रकृति को निहारने, ताजी हवा और गुनगुनी धूप लेने से डिप्रेशन को काफी हद तक कम किया जा सकता है. बंद घर में रहने से लोगों में बेचैनी, अनिद्रा आदि समस्या हो सकती हैं. इससे दिल की धड़कन आसामान्य होना, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी होती हैं.

Image result for pure air in the house feel it

via

यूएस की यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टिकट हेल्थ सेंटर में कैंसर एपिडेमियालॉजिस्ट के प्रोफेसर रिचर्ड स्टीवन का कहना है कि शाम के समय घर में जितना हो सके, धीमी रोशनी का उपयोग करें, विशेषकर सोने के कमरे में. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइंस के प्रोफेसर रसेल फोस्टर भी सूरज ढलने के बाद धीमी रोशनी के इस्तेमाल करने की वकालत करते हैं. वह कहते हैं कि सूरज की रोशनी में रहना बेहद जरूरी है, विशेषकर सुबह के समय.

Related image

via

सुबह के समय हमारी बॉडी क्लॉक सबसे अधिक संवेदनशील होती है. सुबह का नाश्ता भी प्राकृतिक  रोशनी में बैठकर कीजिए. खिड़की के पास बैठकर या बरामदे में बैठने के बजाय, घर से बाहर कुछ समय जरूर बिताएं.

home at metropolitan city

via

बंद घरों में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रामें नहीं पहुंचती. घरों के भीतर मौजूद प्रदूषण दूषित हवा के साथ हमारे शरीर में जाकर फेफड़ों से जुड़ी समस्या को बढ़ाता है. इससे सांस लेने में परेशानी, दिल की धड़कन का आसामान्य होना आदि समस्या होती हैं. ताजी हवा घर के अंदर आए, इसके लिए खिड़कियों को खुला छोड़ें. सूरज की रोशनी को घर के अंदर आने दें. रात के समय घर की खिड़कियों को खुला रखें. इससे बासी हवा बाहर जाएगी और ताजी हवा घर के भीतर आएगी. घर के भीतर व बालकनी में एक छोटी बगिया बनाएं. इससे मन भी प्रसन्न रहेगा और तनाव जैसी समस्या भी नहीं होगी.

Related image

via

स्कॉटलैंड की स्टर्लिंग यूनिवर्सिटी में हुए एक रिसर्च के अनुसार, बंद घर में रहना डिप्रेशन को बढ़ाता है. डिप्रेशन को दूर करने के लिए टहलना, पेड़ों के बीच जाना, बाहरी वातावरण को देखना असरदार होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि प्रकृति को निहारने, ताजी हवा और गुनगुनी धूप लेने से डिप्रेशन को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com