यशवंत सिन्हा की धरने से उपजे सवाल, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

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भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा द्वारा कर्नाटक के घटनाक्रम को लेकर संसद भवन के सामने धरना आरंभ कर दिया गया है भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा के इस धरने से राजनीतिक सरगर्मियां बहुत तेज हो गई हैं संभव है कि यशवंत सिन्हा का साथ देने के लिए शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर तमाम वे लोग सामने आ जाएं जो कहीं न कहीं अभी तक अपने आप को व्यक्त नहीं कर पा रहे थे।

इसमें कोई दो मत नहीं है कि यशवंत सिन्हा का धरना मौजूदा घटनाक्रम में बेहद अहम है क्योंकि आज के हालात में यशवंत सिन्हा जैसे बहुत कम लोग बचे हैं जो मोर्चे पर सामने आएंगे । कांग्रेस और अन्य पार्टियां तो अपने साथ हुए गलत फैसले के खिलाफ आंदोलन में खड़ी होंगी ही लेकिन यशवंत सिन्हा का खुलेआम सामने आना बहुत अहम है।

इसमें कोई दो मत नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक मुद्दे पर सरकार बनाने की पहल कर अपने आपको एक बड़े संकट में डाल दिया है । सवाल यह भी है कि बगैर तोड़फोड़ के भाजपा की सरकार आखिर बनेगी कैसे , और भाजपा के लिए यह मुददा भी मुसीबत का कारण बन रहा है कि गोवा और अन्य राज्यों में जब कांग्रेस के पास ज्यादा सीटें थी तो उसे सरकार बनाने के लिए राज्यपाल ने क्यों नही बुलाया।

लेकिन इसके ठीक विपरीत कर्नाटक में राज्यपाल ने भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर लिया। TV चैनलों पर बहस चल रही है उसमें यह बात खुलेआम कहीं जा रही है कि क्या भारतीय जनता पार्टी के लिए नियम कानून कायदे अलग हैं और बाकी पार्टियों के लिए अलग । इसमें कोई दो मत नहीं है की 2019 के चुनाव के पहले भारतीय जनता पार्टी के लिए कर्नाटक का मुद्दा बहुत चुनौती भरा साबित होगा।

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