यमराज का इकलौता मंदिर, जहां जाने से भी डरते है लोग

0
102

धनतेरस पर जहां एक तरफ मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है वहीं इस दिन यमराज की पूजा भी की जाती है। धनतेरस के दिन एक दिया यम देवतपा के नाम का भी रखा जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु टल जाती है। कहा जाता है कि यमराज आत्मा को स्वर्ग या नर्क में भेजने से पहले उसको धरती पर मौजूद एक मंदिर में ले जाते हैं और उस मंदिर में व्यक्ति के पाप और पुण्यों का हिसाब होता है और उसके बाद ही यम उसेे अपने साथ लेकर जाते हैं। बताया जाता है कि पूरी दुनिया में यमराज का यह इकलौता मंदिर है।

यमराज का यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले के भरमौर में स्थित है। इस मंदिर को लेकर कई बाते कही जाती है। कहा जाता है कि इस मंदिर के अंदर कोई भी घुसने का प्रयास नहीं करता है और ज्यादातर लोग इस मंदिर से दूर रहना ही पसंद करते है। इस मंदिर को देखते ही लोग बाहर से ही हाथ जोड़ लेते हैं और दूर से ही दर्शन कर वापस लौट जाते हैं। देखने में यह मंदिर किसी घर की तरह दिखाई पड़ता है।

मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर के अंदर एक खाली कमरा है। जिसे चित्रगुप्त का कमरा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जब किसी व्यक्ति की मौत होती है तो यमदूतों को उसकी आत्मा लाने के लिए भेजा जाता है। इसके बाद आत्मा को सबसे पहले चित्रगुप्त के पास ले जाया जाता है फिर चित्रगुप्त उस आत्मा के कर्मों का लेखा-जोखा देते हैं।
चित्रगुप्त के काम के बाद आत्मा को चित्रगुप्त के कमरे के सामने वाले कमरे में ले जाया जाता है, जहां पर यमराज की अदालत लगती है। जिसमें कार्रवाई होती ह जहां यमराज तय करते है कि व्यक्ति की आत्मा को कहां भेजा जाए स्वर्ग या नर्क।

गरूड़ पुराण के अनुसार इस मंदिर में चार अदृश्य द्वार हैं, जो सोने, चांदी, तांबा और लोहे के बने हुए हैं। यमराज का फैसला आने के बाद यमदूत आत्मा को कर्मों के अनुसार इन्हीं द्वारों से स्वर्ग या नर्क में ले जाते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here