प्रसिद्ध लेखिका डॉ पदमा सिंह की एक कविता एकांत का राग | Famous Writer Dr. Padma Singh poem ‘EKANTH KA RAAG’

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कविता पकती है
धीरे- धीरे
मन के कोनों में
चुपचाप !

एक अहसास है
जो करता रहता है
बेचैन !
हर पल
जागते सोते!

इकट्ठा होते रहते हैं
शब्द
टूटते बिखेरते रहते हैं
फिर एकजुट होकर
घूमने लगते हैं !
बनाने लगते हैं
भँवर !

दिल से गहरा रिश्ता होता है
शब्दों का!
आखिर दिल ही तो है !
जलती बुझती
लालटेन की तरह!
अँधेरा -उजाला
महसूस करता है!
धड़कन भी इसी लय को
थाम लेती है!

जब पिघलता है दर्द
करुणा की नदी बन कर
बहने लगता है!

अक्सर दुख
दोस्ती कर लेता है
शब्दों से
सुनता है पदचाप उनकी
सूने में!

सुख
किसी शौक की तरह
करता है खिलवाड़
शब्दों से!
वक्त बे वक्त
सजाता रहता है
वंदनवारों सा!

दिल के टूटने की
आवाज नहीं आती!
जैसे कांसे का बरतन
गिर कर
बेचैन करता रहता है
झनझनाहट गूंजती रहती है
देर तक
एकांत को
कुछ और गहराती।

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