देश में स्वास्थ्य सेवाओं के बदतर हालात, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

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हमारे देश में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात बदतर होते जा रहे हैं हालत यह है कि पूरे विश्व में 195 में से 145 में नंबर पर हमारा देश खड़ा है। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में निश्चित रूप से यह स्थिति भारत जैसे देश के लिए बहुत शर्मनाक है आखिर क्या वजह है कि सरकार अपने स्वास्थ्य बजट को लगातार घटाती जा रही है जबकि स्वास्थ्य सेवाएं व्यक्ति के लिए पहली आवश्यकता है।

आज भी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पूरे देश में इतनी अधिक खराब है कि हाल ही में बिहार में एक परिवार के दो बच्चों को अपनी मां को 5 किलोमीटर दूर भीषण गर्मी में ठेले पर लादकर ले जाना पड़ा क्योंकि फोन करने के बाद भी ना तो एंबुलेंस आई थी और ना ही अन्य कोई साधन उन्हें मिला ।यह स्थिति बताती है सरकार की उपेक्षा के कारण स्वास्थ्य सेवाएं कितने बदतर हालात में पहुंच गई है । गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत इतनी अधिक बदतर है कि वहां पर दिनभर दरवाजे ही नहीं खुलते इसी तरह से शहर के आसपास जो स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं उनमें कभी डॉक्टर तो कभी नर्स नहीं मिलती और अगर यह मिल भी जाए तो दवाइयां नहीं मिलती ।

भारत सरकार को इस मामले में बेहद गंभीरता से एक नीति बनाकर स्वास्थ्य सेवाओं के बजट को बढ़ाना चाहिए अन्यथा 145 नंबर से हो सकता है कि भारत का नंबर और अधिक बदतर स्थिति में पहुंच जाएं।ब देखने वाली बात तो यह भी है कि कई देश जो बहुत छोटे हैं उन्होंने भी स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी है।

ऑस्ट्रेलिया अमेरिका और कई अनेक देशों में नागरिकों के स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी सरकार पर रहती है और सरकार द्वारा उन्हें सारी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती है ।मोदी हेल्थ प्लान के बाद संभव है कि हमारी इस रैंकिंग में सुधार आए लेकिन फिलहाल जो सर्वे सामने आया है उससे साबित होता है कि हमारे देश के हालात जल्द सुधरने वाले नहीं हैं।

अर्जुन राठौर

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