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बस्तर का दशहरा.. एक अनोखी परंपरा

Posted on: 19 Oct 2018 17:26 by shilpa
बस्तर का दशहरा.. एक अनोखी परंपरा

the world’s longest festival celebrated in Bastar

छत्तीसगढ़ का बस्तर एकमात्र जगह है जहां दशहरे पर रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता। यहाँ का दशहरा पर्व इसलिए भी अूनठा है क्योंकि ये विश्व का सबसे दीर्घ अवधि वाला पर्व है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला दशहरा पूरे 75 दिन तक मनाया जाता है। बस्तर के लोग 600 साल से यह पर्व मनाते आ रहे हैं।

यह पर्व बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा हुआ है। यह संगम है बस्तर की संस्कृति, राजशाही, सभ्यता और आदिवासी के आपसी सद्भावना का।

बस्तर दशहरा का विकास एक ऐसी परंपरा के रूप में हुआ जिस पर आदिवासी समुदाय ही नहीं समस्त छत्तीसगढ़वासी गर्व करते हैं। आदिवासियों की अभूतपूर्व भागीदारी की वजह से भी इस पर्व को जाना जाता है। इस पर्व का आरंभ वर्षाकाल के श्रावण मास की हरेली अमावस्या से होता है। रथ निर्माण के लिए प्रथम लकडी का पट्ट विधिवत काटकर जंगल से लाया जाता है, इसे पाट जात्रा विधान कहा जाता है। पट्ट पूजा से पर्व के महाविधान शुरू होता है।

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नए कपड़े में चंदन का लेप देकर एक मूर्ति बनाई जाती है। उस मूर्ति को पुष्पाच्छादित कर दिया जाता है। मावली माता निमंत्रण पाकर दशहरा पर्व में सम्मिलित होने जगदलपुर पहुँचती हैं।

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