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World Red Cross Day: एक भयावह युद्ध से आया था रेड क्रॉस का आईडिया | World Red Cross Day 2019

Posted on: 08 May 2019 10:56 by Surbhi Bhawsar
World Red Cross Day: एक भयावह युद्ध से आया था रेड क्रॉस का आईडिया | World Red Cross Day 2019

आज यानी 8 मई को पूरी दुनिया रेड क्रॉस डे मनाती है। रेड क्रॉस एक संस्था है जो सशस्त्र हिंसा और युद्ध में पीड़ित लोगों एवं युद्धबंदियों के लिए काम करती है। यह संस्था उन कानूनों को प्रोत्साहित करती है जिससे युद्ध पीड़ितों की सुरक्षा होती है। इसके साथ यह लोगों को स्वास्थ के प्रति जागरूक रखने में भी मदद करती है। इसका मुख्यालय जिनीवा स्विटजरलैंड में है।

जीन हेनरी डयूनेन्ट ने की स्थापना

रेड क्रॉस की स्थापना 8 मई 1863 को जीन हेनरी डयूनेन्ट ने की थी। जीन हेनरी डयूनेन्ट काे मानव सेवा के लिए 1901 में पहला नोबेल पुरस्‍कार भी मिल चुका है। पहले और दूसरे विश्व युद्ध में रेड क्रॉस ने अहम् भूमिका निभाते हुए घायल सैनिकों और नागरिकों की मदद की थी। इस संस्था को 1917 में नोबेल शांति पुरस्‍कार से नवाजा गया था। आईसीआरसी को दुनिया भर की सरकारों के अलावा नेशनल रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसायटीज की ओर से फंडिंग मिलती है।

ऐसे आया था आईडिया

दरअसल, स्विटजरलैंड के एक उद्यमी जीन हेनरी डयूनेन्ट 1859 में फ्रांस के सम्राट नेपोलियन तृतीय की तलाश में गए थे। उन दिनों अल्जीरिया पर फ्रांस का कब्जा था। डिनैंट को उम्मीद थी कि अल्जीरिया में व्यापारिक प्रतिष्ठान खोलने में नेपोलियन उनकी मदद करेंगे। लेकिन डिनैंट को सम्राट नेपोलियन से मिलने का मौका नहीं मिला।

इसके बाद वह इटली चले गए, जहां उन्होंने सोल्फेरिनो का युद्ध देखा। वहां उन्होंने देखा कि उस युद्ध में एक ही दिन में 40 हजार सैनिक मारे गए और बहुत से घायल भी हुए। किसी भी सेना के पास घायल सैनिकों की देखभाल के लिए चिकित्सा कोर नहीं थी।

तब डिनैंट ने स्वंयसेवकों का एक समूह बनाया और घायलों तक खाना- पानी पहुंचाया। घायलों का उपचार किया और उनके परिवार के लोगों को पत्र लिखा। इस घटने के तीन साल बाद डिनैंट ने एक किताब लिखी ‘अ मेमरी ऑफ सोल्फेरिनो’। इस किताब में उन्होंने अपने दुखद अनुभव को प्रकाशित किया।

इस घटना के 3 साल बाद डिनैंट ने अपने इस दुखद अनुभव को एक किताब के रूप में प्रकाशित किया। किताब का नाम था उन्होंने युद्ध के भयावह दृश्य के बारे में पुस्तक में लिखा था। उन्होंने बताया कि कैसे युद्ध में अपने अंगों को गंवाने वाले लोग कराह रहे थे। उनको मरने के लिए छोड़ दिया गया था।

इस किताब में उन्होंने बताया कि कैसे उस युद्ध में लोग अपने अंग गंवाकर कराह रहे थे। किताब के अंत में उन्होंने एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय सोसायटी की स्थापना का सुझाव दिया था। ऐसी सोसायटी जो युद्ध में घायल लोगों का इलाज कर सके। ऐसी सोसायटी जो हर नागरिकता के लोगों के लिए काम करे। उनके इस सुझाव पर अगले ही साल अमल किया गया और रेड क्रॉस संस्था की स्थापना हुई।

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