World Cup 2019: धोनी के ग्लव्स पर दिखा ये खास निशान, हर कोई नहीं कर सकता इस्तेमाल

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नई दिल्ली: क्रिकेट का महाकुंभ वैसे तो 30 मई से हो गया है लेकिन 5 जून को साउथेम्प्टन में टीम इंडिया ने अपने वर्ल्ड कप अभियान का जीत के साथ आगाज किया। विराट सेना ने दक्षिण अफ्रीका को 6 विकेट से मात दी है और जीत के साथ वर्ल्ड कप की शुरुआत की। इस मैच में युजवेंद्र चहल की धारदार गेंदबाजी के अलावा रोहित शर्मा की जोरदार शतकीय पारी ने सुर्खियां बटोरीं।

इसके अलवा मैच में यदि दर्शकों की नजरे जिसपर टिकी वह है महेंद्र सिंह धोनी। दरअसल, बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ् हुए मुकाबले के दौरान धोनी के ग्लव्स पर एक खास निशान देखने को मिला। खास बात तो ये है कि जो निशान उनके ग्लव्स पर था उसे हर कोई नहीं इस्तेमाल कर सकता। यह बैज पैरा-कमांडो लगाते हैं, जिसे ‘बलिदान बैज’ के नाम से जाना जाता है।

क्या है यह बैज?

पैराशूट रेजिमेंट के विशेष बलों के पास उनका एक बैज होता है जिसे ‘बलिदान बैज’ के नाम से जाना जाता है। इस बैज में ‘बलिदान’ शब्द को देवनागरी लिपि में लिखा गया है। चांदी की धातु से बने इस बैज के उपर की तरफ लाल प्लास्टिक का आयत होता है। यह बैज केवल पैरा-कमांडो ही पहनते है।

धोनी ने क्यों पहना?

क्रिकेट में भारतीय टीम के पूर्व कप्तान की उपलब्धियों को देखते हुए 2011 में उन्हें प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक दी गई थी। धोनी को मानद कमीशन दिया गया क्योंकि वह एक युवा आइकन हैं और वह युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। धोनी एक प्रशिक्षित पैराट्रूपर हैं. उन्होंने पैरा बेसिक कोर्स किया है और पैराट्रूपर विंग्स पहनते हैं।

2015 में बने प्रशिक्षित पैराट्रूपर

अगस्त 2015 में महेंद्र सिंह धोनी ने प्रशिक्षित पैराट्रूपर बन गए थे। आगरा के पैराट्रूपर्स ट्रेनिंग स्कूल में वायुसेना के AN 32 विमान से पांचवीं छलांग लगाने के बाद उन्हें प्रतिष्ठित पैरा विंग्स प्रतीक चिह्न लगाने की अर्हता मिल गई थी। कपिल देव के बाद यह सम्मान पाने वाले धोनी दूसरे भारतीय क्रिकेटर है।

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