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बैंकिंग इंडस्ट्री की हालत बेहद बदतर हो रही है, अथर्व राठौर की कलम से….

Posted on: 27 Jun 2018 12:48 by krishnpal rathore
बैंकिंग इंडस्ट्री की हालत बेहद बदतर हो रही है, अथर्व राठौर की कलम से….

सरकारी बैंकों का बढ़ता एनपीए सरकार के लिए और रिजर्व बैंक के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है रिजर्व बैंक द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी बैंकों का एनपीए जो मार्च में 11 पॉइंट 6% था वह बढ़कर 16 पॉइंट 3% हो सकता है अगर यह ऐसे ही हालात रहे तो फिर बैंकों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा एनपीए की समस्या सरकारी बैंकों में ज्यादा बढ़ेगीImage result for एनपीए बैंक ग्राफ

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यह भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि स्थिति ज्यादा खराब होने पर एनपीए 17 पॉइंट 3% भी हो सकता है इसकी मुख्य वजह एनपीए के बदले ज्यादा प्रोविजनिंग है एनपीए में इंडस्ट्री सेगमेंट का हिस्सा 22 पॉइंट 8% है जबकि सितंबर में यह 19 पॉइंट 4% था इंडस्ट्री सेगमेंट में मछली छोटी कंपनियां शामिल है

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12 फरवरी को एनपीए के नए गाइडलाइंस आने के बाद बैंकों का एनपीए 10 लाख करोड रुपए से अधिक हो गया इसमें 5 करोड़ से ज्यादा कर्ज लेने वालों का हिस्सा 50% है इधर पीसीए श्रेणी के बैंकों का एनपीए जो मार्च 2018 में 21 प्रतिशत था वह मार्च 2019 में 22 पॉइंट 30% तक जा सकता है और यह भी चेतावनी दी गई है अगर सरकार ने इनमें पूंजी नहीं डाली तो इनका पूंजी अनुपात सिक्स पॉइंट 3% तक गिर सकता है जो कि मार्च 2018 में 10 पॉइंट 8% था

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कुल मिलाकर बैंकों का बढ़ता एनपीए रिजर्व बैंक के लिए गंभीर चिंता का विषय बनने के साथ ही यह संकेत भी दे रहा है कि आने वाले समय में बैंकों के खर्चे ओर डूबते लोन पर अगर नियंत्रण नहीं किया गया तो बैंकों के लिए बेहद खराब स्थिति हो जाएगी

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