चुनावी त्यौहार में भोजन गरीबों के घर ही खाने का रिवाज क्यों है ? | Why is the custom of eating food at poor ‘s home in the election festival?

0
91
election

नीरज राठौर

ईद, दिवाली, होली जैसे त्योहारों में भी भोज का आयोजन होता है और अपने घर बुलाकर भोजन करवाया जाता है | ऐसा भी होता है कि अपने प्रियजनों के घर मिठाई या हाथों से बने पकवान भिजवाए जाते हैं | उद्देश्य केवल यह होता है कि परस्पर प्रेम और सद्भाव बना रहे, बढ़ता रहे |

लेकिन चुनावी त्यौहार वाले इन भोजों में नेता लोग गरीबों के घर ही क्यों जाते हैं, गरीबों को अपने घर बुलाकर क्यों नहीं खिलाते ?

must read: भाजपा के थीम सॉन्ग पर चुनाव आयोग की कैंची | EC bans West Bengal BJP theme song by Babul Supriyo

एक तो बेचारे अपनी गरीबी से त्रस्त होते हैं, फिर महँगाई की मार अलग कमर तोड़कर रखती है | ऊपर से उन लोगों को खिलाना पिलाना, जो जीतने के बाद मुड़कर भी नहीं देखेंगे….कुछ हज़म नहीं होता | फिर जिन्हें हज़ारों करोड़ों की दलाली और रिश्वत डकारने की लत हो, उन नेताओं के लिए तो गरीबों का यह भोजन ऊँट के मुँह में रखे जीरे का हजारवाँ अंश भी नहीं होगा |

वैसे यह रिवाज या परम्परा कब और किसने शुरू की थी ???

must read: PM मोदी बोले- ‘गजनी‘ की तरह वादे कर भूल जाती है कांग्रेस | PM Modi says – Congress will promises like ‘Ghajini’ and then forget

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here