क्यों दशरथ मांझी को भारत रत्न मिलना चाहिए

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manjhi

एक सच्चे प्रेम की सच्ची अमर कथा जहां एक इंसान जो अपनी पत्नी को समय पर अस्पताल नहीं ले जा सका क्योंकि रास्ते में पड़ता था एक विशाल पहाड़.
उस पहाड़ के कारण गांव के लोगों को पैदल 15 किलोमीटर लम्बा चक्कर लगा कर अस्पताल तक पहुँचना पड़ता था। इसी कारण जब बिना इलाज के उसकी पत्नी की मौत हो गई तो उसने संकल्प लिया कि अब गांव के किसी व्यक्ति को बिना इलाज के न मरना पड़ेगा. इस भगीरथ प्रतिज्ञा को धरती पर उतारने के लिए पूरे 22 वर्षो तक उस पहाड़ के सीने को चीरकर सिर्फ छेनी हथौड़ी से काटकर पहाड़ के गर्व को झुका दिया और बीचों बीच रास्ता बना दिया, जिससे कभी किसी की इलाज के कारण मौत ना हों।

यह मेरे लिए किसी प्रेरणा व विश्व के 8वें अजूबे से कम नहीं हैं। मैं चाहे कहीं कभी कुछ और देखने जाऊँ या ना जा जाऊँ लेकिन उस गरीब मांझी जी का वह अद्भुत कारनामा देखने जरूर जाऊंगा। मेरा समस्त देश वासियों की ओर से भारत सरकार से विन्रम निवेदन हैं कि ऐसे अटल इरादे वाले दशरथ मांझी जी को “भारत रत्न” देने के लिए जरूर एक बार विचार विमर्श करें।

इस निवेदन को शेयर जरूर करें ताकि यह सन्देश पूरे देश और सरकार तक पहुंच सके और मांझी जी को उनका असली सम्मान मिल सके।

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