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मध्य प्रदेश सरकार के भ्रष्ट और बेईमान अधिकारियों को क्यों बचाया जा रहा है

Posted on: 02 Jul 2019 09:45 by Pawan Yadav
मध्य प्रदेश सरकार के भ्रष्ट और बेईमान अधिकारियों को क्यों बचाया जा रहा है

अर्जुन राठौर
इंदौर।
मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की स्थापना इसलिए की गई थी, ताकि प्रदेश सरकार के बेईमान और भ्रष्ट अधिकारियों को धर दबोचा जा सके और उन्हें सजा दिलाई जा सके लोकायुक्त ने किसी हद तक प्रदेश के बेईमान अधिकारियों के खिलाफ मुहिम भी चलाई और उन्हें रंगे हाथों पकड़ा और उनकी अरबों रुपए की संपत्ति का खुलासा भी किया, लेकिन लोकायुक्त के अधिकारों का हनन तब हुआ, जब सरकार ने पकड़े गए भ्रष्ट अधिकारियों पर न्यायालय में केस चलाने की अनुमति देने का अधिकार अपने पास रख लिया याने लोकायुक्त भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ तो सकता है|

लेकिन उनके खिलाफ न्यायालय में प्रकरण दर्ज करने के लिए उसे राज्य सरकार की अनुमति लेना पड़ेगी। और यहीं से शुरू हुआ एक नए भ्रष्टाचार का खेल भोपाल में वल्लभ भवन में बैठे बड़े अधिकारी लोकायुक्त को कुछ ही मामलों में अदालत में केस चलाने की अनुमति देते हैं और बहुत से अधिकारियों को बचा लिया जाता है। वर्तमान में 282 ऐसे भ्रष्ट और बेईमान अधिकारी हैं जिनके खिलाफ लोकायुक्त राज्य शासन से अनुमति मांग रहा है, लेकिन अनुमति नहीं मिल रही है सीधी सी बात है कि भ्रष्टों को पकड़ने के लिए लोकायुक्त हैं, लेकिन उनके खिलाफ लोकायुक्त सीधे-सीधे मुकदमा दायर नहीं कर सकता भ्रष्ट अधिकारी वल्लभ भवन में बैठे बड़े अधिकारियों की शरण में चले जाते हैं और वहां पर उनके प्रकरणों को अनुमति नहीं मिलती।

भ्रष्टाचारी फिर से सरकार की पनाह ले लेते हैं अब यहां सवाल इस बात का भी उठता है कि जब लोकयुक्त की स्थापना की गई है और उसका कार्य भी भ्रष्ट अधिकारियों को पकड़ना है तो उसे सीधे-सीधे चालान पेश करने की अनुमति क्यों नहीं दी जाती यहीं पर सरकार की नीयत पर शंका होती है कि वह भ्रष्ट अधिकारियों को क्यों बचा रही है। ऐसे में कमलनाथ सरकार लोकायुक्त को चालान पेश करने के पूरे अधिकार देकर इस बात का दावा कर सकती है कि उनकी सरकार बेईमानों के खिलाफ है।

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