आवासीय भूखंड पर बने सीएचएल कैंसर अस्पताल पर कब चलाएगा नगर निगम बुलडोजर

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अर्जुन राठौर-

आवासीय भूमि पर बने सीएचएल कैंसर अस्पताल को लेकर इंदौर शहर की जनता यह जानना चाहती है कि नगर निगम का बुलडोजर इस पर कब चलेगा क्योंकि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने यह आदेश दिया था कि नगर निगम आयुक्त इस पूरे मामले को देखने के बाद यह निर्णय ले कि इस अवैध इमारत को लेकर वह क्या कदम उठा रहे हैं।

तत्कालीन नगर निगम आयुक्त ने 2015 में पूरे प्रकरण की सुनवाई की । इसमें उन्होंने सीएचएल अस्पताल की अवैध इमारत के बारे में उनके वकील का पक्ष भी सुना। सुनवाई के बाद आयुक्त ने अपने फैसले में कहा कि मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा 308 में स्वीकृत उपयोग पर ही कंपाउंडिंग का प्रावधान है ना कि उपयोग परिवर्तन के संबंध में अतः नगर निगम का प्रकरण में कंपाउंडिंग करने का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता। जब तक कि सक्षम प्राधिकारी यानी नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा प्रश्न अधीन स्थल का स्थल अनुमोदन वाणिज्यिक उपयोग हेतु ना कर दिया जाए एवं आवेदन प्रस्तुत कर वहां से इंदौर विकास योजना 2021 के प्रावधानों के अनुसार यदि सक्षम स्वीकृति प्राप्त करता है तथा तद क्रम में यदि उसके द्वारा नगर पालिका निगम इंदौर में पुनरीक्षित भवन अनुज्ञा स्वीकृति हेतु आवेदन किया जाता है तो नगर पालिका निगम इंदौर द्वारा नियम तथा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

अतः आवेदक द्वारा जब तक सक्षम प्राधिकारी से उक्त आशय की अनुमति प्राप्त नहीं की जाती है तब तक भवन का उपयोग स्वीकृत भवन अनुज्ञा अनुसार आवासीय प्रयोजन हेतु ही करना होगा। इस प्रकरण में उपरोक्त विवेचना के क्रम में जब यह स्पष्ट है कि आवासीय स्वीकृत भवन में चिकित्सा की गतिविधियों का उपयोग नहीं किया जा सकता है नहीं चिकित्सकीय उपयोग को कंपाउंड किया जा सकता है।

तब भविष्य में क्या उपाय है? मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के नियम 11 में अधिभोग का अतिक्रमण करने की जाने वाली कार्रवाई के व्यापक प्रावधान किए गए हैं। मध्य प्रदेश विकास नियम 2012 का नियम 11 अधिभोग का अतिक्रमण जब किसी व्यक्ति द्वारा इन नियमों के विपरीत भवन का उपयोग किया जाता रहा हो वहां निर्माण अधिकारी सूचना द्वारा ऐसे उपयोग को बंद करने की अपेक्षा कर सकते हैं ऐसा व्यक्ति ऐसी सूचना प्राप्त होने के 10 दिन के भीतर उपयोग करना बंद कर देगा या भवन या उसके भाग को इस प्रकार बनाएगा।

जिससे कि नियमों की अपेक्षाओं का पालन हो जाए। इस भवन अधिकारी मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के नियम के अनुसार कार्रवाई करें एवं यदि आवश्यकता हो तो मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के नियम साथ में भवन अधिकारी को अवैध निर्माण और उपयोग के संबंध में आवश्यक कार्य करने की शक्तियां प्रदान की गई है तदनुसार भी कार्रवाई करें।

अब सवाल इस बात का है कि जब 2015 में तत्कालीन निगमायुक्त द्वारा स्पष्ट कर दिया गया था कि न तो सीएचएल कैंसर अस्पताल के भवन का कंपाउंडिंग हो सकता है और ना ही इसे नगर निगम की किसी अन्य धारा के तहत छूट मिल सकती है, ऐसे में इस भवन को तोड़ दिया जाना चाहिए।

आयुक्त ने यह भी कहा था कि नगर निगम के अधिकारी अवैध भवन के उपयोग पर पाबंदी भी लगा सकते हैं इसके साथ ही नगर निगम द्वारा दिए गए नोटिस के निर्माणकर्ता से अपेक्षा की जाती है कि वह स्वत ही उपयोग बंद कर देगा और भवन या उसके नियमों का पालन हो जाए। लेकिन आज तक ना तो इस भवन निर्माण का उपयोग बदला और ना ही उपयोग बंद किया।

नगर निगम के अधिकारियों द्वारा इस मामले में उदासीन रवैया क्यों अपनाया जा रहा है यह समझ के बाहर है।

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