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जब प्यार है तो तलाक की नौबत क्यों, किसान आंदोलन पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश राठौर की टिप्पणी

Posted on: 30 May 2018 10:07 by Ravindra Singh Rana
जब प्यार है तो तलाक की नौबत क्यों, किसान आंदोलन पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश राठौर की टिप्पणी

किसान का बेटा शिवराज खेती से प्यार करता है और खेती करने वाले किसान को अपना देवता मानता है, तो फिर यह तलाक की नौबत क्यों आ गई क्या कारण है, कि शिवराज सिंह चौहान लगातार किसानों के लिए काम कर रहे हैं तब भी किसान नाराज हैं, क्या कारण है कि देश में सबसे अच्छा किसानों के लिए काम करने पर मध्य प्रदेश सरकार को लगातार कृषि कर्मण अवार्ड मिलते जा रहे हैं। उसके बाद भी किसान अपने प्यार से जुदा क्यों हो रहा है शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री रहते हुए जितनी गांव की खाक छानी है जितना किसानों के लिए करा है उतना तो शायद किसी ने कभी नहीं किया यह बात अलग हो सकती है कि शिवराज का अफ़सर प्रेम इस प्यार में तलाक के पेपर लेकर घूम रहा हो।

जब शिवराज सिंह किसानों की सभा में जाते हैं तो हमने देखा है, कि किस तरह से किसान उनसे मिलने के लिए लालायित रहते हैं, किसानों के बेटे बेटियों के लिए जितनी योजनाएं बना दी और उनका यदि आधा भी लाभ किसानों को मिल गया तो भी फिर इस तरह की आवश्यकता नजर नहीं आती है। क्या कारण है, कि किसानों को आंदोलन करने के लिए मजबूर करने वाली ताकतें शिवराज सिंह चौहान की ताकत के आगे कमजोर साबित नहीं हो रही है, वह कौन से कारण है जिसे सरकार को तलाशना चाहिए कि किसान हर साल आंदोलन करने की धमकी देता है उन तत्वों का सहारा बन जाता है, जो शिवराज के खिलाफ अभियान चलाकर कहीं न कहीं अपना उल्लू साधना चाहते हैं ।

यदि संघ से अलग होकर किसी ने कोई संगठन बना लिया तो क्या इसका मतलब यह है कि वह इतनी बड़ी ताकत बन गया कि सरकार को हिलने पर मजबूर कर दिया पूरी सरकार लगातार किसानों के काम के कारण आर्थिक रूप से दिवालिया हो चुकी है हर विभाग का पैसा किसानों को बांटने के लिए कृषि विभाग को दे दिया। किसानों के अलावा बाकी काम मध्यप्रदेश में प्रभावित हो गए उसके बाद भी किसान क्यों नाराज हैं, जब किसानों के साथ खड़े होकर शिवराज फोटो खिंचाते हैं तो ऐसा लगता है कि यह प्यार जन्मों-जन्मों का है इसमें कभी लड़ाई नहीं हो सकती इसमें कभी दूरी नहीं हो सकती लेकिन जिस तरह का माहौल अभी मध्यप्रदेश में बन गया है उसे देख कर तो लगता है कि यह प्रेम तलाक की नौबत पर आ गया।

गला फाड़ फाड़ कर चिल्लाने वाली शिवराज मेरे किसान मेरे किसान कहते-कहते थक गए तुम मुझसे प्यार नहीं करोगे तो मैं जान दे दूंगा की तर्ज पर शिवराज ने किसानों को हमेशा गले लगाया उन सबके बावजूद मध्य प्रदेश में चुनाव के ठीक पहले जिस तरह का माहौल और अराजकता की स्थिति बन रही है। पूरी सरकार और उसके हर अफसर सड़ा गला किसानों का माल खरीदने के लिए तैयार बैठी रहते है। मुर्गी मुर्गी से लेकर गाय भैंस के मरने तक पर किसानों को पैसा दिया जा रहा है बिजली भरपूर दे रहे हैं बिजली का पैसा वसूलने में सख्ती नहीं हो रही है। तमाम कोशिशें और लगभग 100 करोड़ से ज्यादा के किसानों की योजनाओं के विज्ञापन भी लगता है बेअसर साबित हो गए।

किसानों के बड़े-बड़े सम्मेलन करने का रिकॉर्ड भी मध्य प्रदेश सरकार ने बना डाला आखिर वह कौन सा कारण है, जब यह प्यार कांच के माफिक टूट रहा है और तलाक की बातें हो रही है। किसानों को समझाने के लिए सरकार ने तमाम हथकंडे भी अपनाएं उन सब के बावजूद किसान नाराज होकर सड़कों पर उतर जाता है। कल से आंदोलन शुरू होना है और आज से मंडियों के आसपास माल इतना आ गया है की सड़कें जाम हो गई है। शिवराज किसानों को ट्रेनिंग देने से लेकर विदेश भेजने तक का काम कर चुके हैं। आज भी शिवराज किसानों के लिए पूरी सरकार को तबाह करने पर उतारू हैं, उसके बाद भी क्या कारण है कि शिवराज सिंह चौहान से किसान नाराज हैं।

अब लगता है एक ही है कारण और वह है अफसरशाही। शायद शिवराज सिंह चौहान अफसरशाही के मंसूबे को समझने में सफल नहीं हुए, नहीं तो क्या कारण है कि भोपाल के वल्लभ भवन में बनी सरकारी योजना किसान के खेत तक क्यों नहीं पहुंची और यदि वाकई किसान के खेत तक सारी योजनाएं पहुंच गई है तो फिर वह कौन सी बड़ी ताकत है जिस ताकत ने सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया। क्या शिवराज सिंह ने अफसरों के खिलाफ योजनाओं में लापरवाही को लेकर कोई बड़ी कार्रवाई की है मंदसोर में अफसरों ने गोलियां चलवा दी और किसान मारे गए बस कुछ इसी तरह का अंदेशा फिर नजर आता है। वैसे मध्य प्रदेश शांति का टापू बनता जा रहा है इसलिए यहां पर किसानों को भी शांतिपूर्वक सरकार से बात करनी चाहिए।

राजेश राठौर की कलम से 

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