जब इकलौती कन्या ने अपने माँ व पिताजी की अर्थी को दिया कंधा

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kandha

अनिल कुमार धड़वईवाले

जब इकलौती कन्या ने अपने माँ व पिताजी की अर्थी को कंधा दिया और मुखाग्नि दी,
तब मेरी आँखों से अपनेआप आंसू टपक पड़े,,,,
साथ ही अंदर के अंदर गुस्सा भी उछाले मार रहा था,,,,

दोपहर की ही बात है।मैं मेरे मित्र रहे स्व. गुणवंत और उसकी पत्नी स्व.वंदना के अंतिम संस्कार के समय रामबाग मुक्तिधाम में मौजूद था। बीमा नगर निवासी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय स्वयंसेवक गुणवंत और उनकी पत्नी ने एक महिला द्वारा पुलिस में दुष्कर्म संम्बंधी शिकायत करने की धमकी देने से दहशत में बड़वानी की एक हॉटेल में जहर खाकर आत्महत्या की थी।

उन दोनों के शव पलासिया पुलिस इंदौर लेकर आई। बाद दोनों शव शव वाहन द्वारा रामबाग मुक्तिधाम लाये गये। शवो को उतारने के बाद उनकी इकलौती विवाहित लड़की आराधना और उसके पति ने कुछ देर कंधा दिया।तब मेरे अलावा वहां मौजूद अनेक संवेदनशील लोगों की आंखे भर आयी थी।

मन को विचलित करने वाला नजारा था। उसके बाद आराधना के द्वारा ही आवश्यक अंत्यविधि संम्पन्न करवाई गयी। फिर समय आया मुखाग्नि देने का। बस, जैसे ही साहसी और संयमी युवा बेटी आराधना ने पहले मां को मुखाग्नि दी।सारा माहौल बेहद गमगीन हो गया था। कई व्यक्ति तो ये सीन देख नही सके। दिल हिला देनेवाला दृश्य था वह। मेरी अभीतक की जिंदगी में मैंने ऐसा दृश्य कभी नही देखा था।

इसी समय मुझे रहकर गुस्सा इस बात से आ रहा था कि भिड़े दम्पत्ति के अंतिम संस्कार के वक्त पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी पच्चीसों पुलिस कर्मियों के साथ मौजूद थे। यही पुलिस प्रशासन अगर इस दम्पत्ति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होते ही सक्रिय होती तो ये हादसा नही होता।इस हादसे के बाद इस मामले में पुलिस कार्यवाही पर वहां मौजूद बुद्धिजीवियों ने सवालिया निशान खड़े किये है।

दूसरी बात समूचे समाज के लिये अत्यंत चिंताजनक घटना होने के उपरांत कोई 100- 125 लोग ही मुक्ति धाम में थे। जिसमे भिड़े- मोघे परिवार के महिला-पुरुष ही ज्यादा तादाद में थे। ताज्जुब तो इस बात से हुआ कि आरएसएस का एक भी वरिष्ठ अधिकारी-कार्यकर्ता वहां नही दिखा।जबकि स्वर्गीय गुणवंत के पिताजी ने अपना सारी जिंदगी आरएसएस के लिये खपा दी थी।भिड़े दम्पत्ति को धमकी देने वाली महिला का नाम अभीतक उजागर नही हुआ है।

 

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