चांद सितारे भी नीरज को जब सुनना चाह रहे थे – वरिष्ठ पत्रकार राजेश राठौर की कलम से

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याद है मुझे वो दिन जब 13 मार्च 2015 को कवि गोपालदास नीरज इंदौर में थे। उनके सुबह आने से लेकर शाम को कविता पाठ शुरू होने के पहले तक बिचोली मर्दाना के उस शांत माहौल में तेज बारिश ने आयोजकों के माथे पर चिंता की लकीर खींची थी,लेकिन नीरज ने कहा था चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा।

आयोजक मेरे मित्र सुभाष खंडेलवाल के बंगले पर जब खुले बगीचे की बजाय घर के बड़े हाल में आयोजन की तैयारी कर रहे थे, तभी वह लगातार मना कर रहे थे कि सब कुछ ठीक होने वाला है। कविता पाठ तो बाहर ही होगा। अंदर इंतजाम होने के बाद शाम सात बजते ही बारिश बंद हो गई। नीरज कमरे से बाहर निकलें मंच तक पहुंचे और उनके मुंह से जब कविता का हर स्वर निकलने लगा तो लगा कि वाकई नीरज सरस्वती पुत्र है। नीरज धरती के आखरी हस्ताक्षर कवि थे। मैं भी वहीं मौजूद था। मैंने भी देखा कि शरीर साथ ना देने और उम्र चेहरे पर झलकने के बाद भी कवि का हौसला किसी नौजवान से कम नहीं था। शुरुआत में जब सुभाष खंडेलवाल ने कहा कि दोस्तों बारिश हो या आंधी हो या तूफान हो आज नीरज का कविता पाठ होना था देखो बारिश थम गई है।

गीली कुर्सियों को साफ कर नीरज के प्रशंसक मंच की तरफ टकटकी लगाए गए बैठ गए। उसके बाद फूलों के रंग से और कारवां गुजरता गया जैसे गीत नीरज ने गाना शुरू कर दिए। लगातार चांदनी रात में ठंडे माहौल में नीरज ने एक ऐसा माहौल बना दिया, जिसका हम सबको इंतजार था। रात दस बजे कविता पाठ समाप्त होने के बाद फिर तेज बारिश होने लगी और उसके बाद दूसरे दिन सुबह तक लगातार बारिश होती रही। नीरज के आने के पहले भी 3 दिन तक लगातार बारिश होने से आयोजन संकट में पड़ गया था, लेकिन बहुत कम लोग जानते थे कि नीरज का विश्वास ज्योतिष और अध्यात्म में भी है उनको पता था कि उनके प्रेमी कविता पाठ सुनना चाहते हैं, और भी सुना कर ही आज मानेंगे। यह उन्होंने साबित कर दिया नीरज के बारे में सुना तो काफी था लेकिन देखा पहली बार। नजदीक से उनसे जब मेरी बात हुई तो वे रुक रुक कर बात करने लगे और उन्हें मुझसे कहा था कि याद रखना यह दुनिया 50 साल बाद मृत्यु पर विजय पा लेगी। उनकी इस बात को मैं नहीं समझ पाया था। अब 3 साल बाद वह इस दुनिया में नहीं रहे नीरज की यादें हमेशा रहेगी। अलविदा नीरज
………राजेश राठौर

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