एक परंपरा…जब लोगों को रौंदती हुईं निकल गईं सैकड़ों गायें

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बडनगर तहसील के गांव भिडावद जो उज्जैन से 75 किलोमीटर दूर स्थित है यहाँ एक अनूठी आस्था देखने को मिली। यहाँ सुबह गाय का पूजन करके लोग जमीन पर लेट गए और उनके ऊपर से गायें निकाली गई। इस प्राचीन परम्परा के पीछे लोगों का मानना है की गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है और इस तरह गाय के पैरों के नीचे आने से देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।

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मान्यता है की यहाँ आकर मांगी गई मन्नतें पूरी होती है, और जिन लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है वे यह प्रथा निभाते है। वर्षों पुरानी परम्परा का निर्वाह करते हुए परम्परा अनुसार लोग पांच दिन तक उपवास करते हैं और दिपावली के एक दिन पहले गांव के मंदिर में रात गुजारते हैं। सुबह पूजन किया जाता है।

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एक और गांव की सभी गायों को एकत्रित किया जाता है और दूसरी तरफ लोग आठ लोगों को एक साथ लिटाया जाता है और उन पर सैकड़ों गाएं इन्‍हें रौंदती निकल जाती हैं। इसके बाद मन्नत करने वाले उठ खडे़ होते हैं और ढोल की धुन पर नाचने लगते हैं। आश्चर्य की बात हैं कि वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में आज तक किसी को गंभीर चोट नहीं आई।

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