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हम कैसा भारत बनाने जा रहे हैं? | what kind of India are we going to make

Posted on: 12 May 2019 12:37 by Surbhi Bhawsar
हम कैसा भारत बनाने जा रहे हैं? | what kind of India are we going to make

बम फोड़कर भारतवासियों की जान लेने के मुक़दमे, जेल और ज़मानत भूल जाइए, जाँबाज़ शहीद अधिकारी को श्राप से मार डालने का दावा भी भुला दीजिए। लेकिन भोपाल की कथित साध्वी गाय पर हाथ फेर कर बीपी घटाने का टोटका प्रचारित कर रही हैं? तीन बार ऑपरेशन से बचने वाली मरीज़ गोमूत्र को कैंसर का इलाज बता रही है? हम कैसा भारत बनाने जा रहे हैं?

पिछले कुछ वर्षों में ख़ूब अज्ञान और अंधविश्वास हमारे रहनुमाओं के श्रीमुख से झड़ा है। उसकी लम्बी सूची है। लेकिन कल प्रधानमंत्री ने न्यूज़ नेशन को कहा कि सेना के अधिकारी ख़राब मौसम के कारण सर्जिकल स्ट्राइक करने से आनाकानी कर रहे थे, तब उन्होंने समझाया कि ख़राब मौसम हमारे लिए अच्छा है: लड़ाकू विमान बादलों में छिप कर जाएँगे तो रडार की पकड़ में नहीं आएँगे। और, ज़ाहिर है, वायुसेना को प्रधानमंत्री के इशारे पर स्ट्राइक करनी पड़ी (कहते हैं जिसमें कोई नहीं मरा, सिवाय एक कव्वे के)।

सब जानते हैं कि रडार की आँख ख़राब मौसम में भी देखती है। हवाई अड्डे तभी काम कर पाते हैं। फिर भी चुनाव के मौसम में प्रधानमंत्री सैन्य अधिकारियों को उलटा ज्ञान और निर्देश दें, क्या यह सेना पर नाजायज़ दबाव डालना नहीं है? क्या यह सेना के आला नेतृत्व का अपमान, उसकी समझ और क्षमता पर अविश्वास नहीं? कहना न होगा, नोटबंदी और सनक भरे अन्य अनेक आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक फ़ैसले देश पर ऐसे ही थोपे गए हैं।

मगर ख़राब मौसम में रडार को प्रधानमंत्री के कथित चकमे ने कल साबित कर दिया है कि असली चकमा देश को मिला है। हम सब उसके शिकार हैं। और दिवाली के पटाखों के बरक्स परमाणु बम की बात सुनकर मैं यह सोचने को विवश हुआ हूँ कि देश क्या वाक़ई सुरक्षित हाथों में है?

मुझे लगता है हम एक अवैज्ञानिक और अनाड़ी भारत बना रहे हैं। ख़तरे की इस घंटी की गूँज हर तरफ़ से उठती सुनाई देती है। मुझे नए काम में लिखने, सामाजिक-राजनीतिक हालात पर टीका करने का वक़्त नहीं मिलता। पर, एक सजग नागरिक के नाते, अपने मन की बात कह रहा हूँ।

यह नितांत निजी टिप्पणी है। मेरे रोज़गार से इसका कोई संबंध नहीं। ओम थानवी के वॉल से

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