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जानिए कविता रैना हत्याकांड की पूरी सच्चाई

Posted on: 21 May 2018 13:01 by Surbhi Bhawsar
जानिए कविता रैना हत्याकांड की पूरी सच्चाई

 इंदौर: कविता रैना हत्याकांड का फैसला आने के बाद पूरे शहर में इस बात को लेकर ना केवल गुस्सा है बल्कि लोग यह भी जानना चाहते हैं कि अगर महेश बेरागी ने कविता रैना की हत्या नहीं की तो फिर उसे किसने मारा। पुलिस ने महेश बेरागी को इस हत्याकांड के लिए जिम्मेदार ठहराया था और उसके बाद उसके खिलाफ सबूत भी इकट्ठे किए थे लेकिन कोर्ट में सबूत फेल हो गए।

कविता रैना की हत्या दिनांक 24 अगस्त 2015 के आसपास हुई थी। इंदौर के कनाड़िया रोड स्थित मिश्र नगर की कॉलोनी में रहने वाली कविता 24 अगस्त 2015 को स्कूल गई अपनी बच्ची को लेने के लिए बस स्टॉप पर गई थी किंतु घर वापस नहीं लौटी। तीसरे दिन 26 अगस्त को उनका शव तीन इमली चौराहे के पास पुल के नीचे बोरे में बंद मिला। भवरकुआ पुलिस ने  हत्या के आरोप में धारा 302 और साक्ष्य छुपाने के आरोप में धारा 201 के तहत केस दर्ज कर महेश बेरागी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था और उसके बाद से ही वह जेल में था।Image result for कविता रैना हत्याकांडपुलिस ने महेश बेरागी के खिलाफ जो सबूत जुटाए थे वे कोर्ट में टिक नहीं पाए। इस घटना से जुड़े हुए जो तथ्य हैं उनके अनुसार घटना का एक भी चश्मदीद गवाह नहीं था। पुलिस ने जुटाये। फ्लैट में हत्या, कपड़े जलना, लाश ले जाने की पुलिस की थ्योरी की पुष्टि आसपास के किसी व्यक्ति ने नहीं की और ना ही कोई साक्ष्य मिला जिसके आधार पर कोर्ट में साबित हो पाता कि महेश ने हीं फ्लेट में हत्या की है।

पुलिस ने फ्लेट से जो खून के नमूने जप्त किए थे उनका उल्लेख भी पंचनामे के साथ था ही नहीं इससे कोर्ट को यह मानने में आसानी हुई कि फ्लेट से खून मिला ही नहीं। यहां पुलिस ने क्यों चुक कर दी यह समझ के बाहर है। सवाल यह भी है कि कुर्ते के नाप के लिए महेश कविता को फ्लैट पर ले गया था। जबकि  कुर्ता 18 अगस्त को ही दे दिया गया था।Image result for कविता रैना हत्याकांडयहां सवाल उठता है कि क्या वास्तव में कुर्ते के नाम के लिए महेश कविता को फ्लेट पर ले गया था और वहां उसने उसकी हत्या की। इधर मीना अग्रवाल ने यह कहा कि कुर्ता 18 अगस्त को ही दे दिया गया था। इसके पश्चात टीआई राजेंद्र सोनी के अनुसार फ्लेट पर पहली बार कुंडी लगी मिली थी। जबकि दस्तावेजों में महेश के पास चाबियां मिलना बताई गई यहां ताला नहीं मिला यहां पर भी पुलिस  कोर्ट में फेल हो गई। पुलिस ने कोर्ट में जो साक्ष्य प्रस्तुत किया उसके अनुसार 12 इंच के चाकू से शव के टुकड़े करना बताया गया।Image result for कविता रैना हत्याकांडलेकिन  डॉ योगी ने कहा कि इतने छोटे चाकू से संभव नहीं है कि किसी व्यक्ति के टुकड़े कर दिए जाएं।  पुलिस कोर्ट में यह साबित नहीं कर पाई कि कविता फ्लैट तक पहुंची कैसे। फ्लेट में कविता रैना  की हत्या की गई लोहे के पाइप से उस पर खून की जांच बेंजीन से  की गई लेकिन दूसरी जांच नहीं की गई जिससे अपराध साबित हो पाता। कोर्ट ने आदेश में लिखा कि क्राइम ब्रांच ने 23 दिन तक महेश को संदिग्ध मानकर रखा लेकिन इस बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। हत्याकांड से जुड़े हुए कुछ और भी पहलू है जो बहुत महत्वपूर्ण है पुलिस ने महेश बेरागी की गिरफ्तारी के बाद 9 से 13 दिसंबर तक की सभी कार्यवाही में लोकेंद्र सिंह और सत्यनारायण सलवार  को स्वतंत्र गवाह बताया।

दोनों गवाहों ने तीन इमली चौराहे पर मिलना बताया । उन्हें मदद के लिए बोला तो वे तैयार हो गए। कोर्ट ने साबित किया कि दोनों स्वतंत्र गवाह नहीं थे। सवाल उठता है कि आखिर कविता रैना हत्याकांड से जुड़े अधिकारी कोर्ट में बार-बार झूठे साबित क्यों हुए विवेचना अधिकारी टीआई राजेंद्र सोनी को कोर्ट ने 12 बार झूठा साबित किया टीआई वही जानकारी दे सके जो उन्हें पता थी।Image result for कविता रैना हत्याकांडक्राइम ब्रांच की कार्रवाई कनाडिया पुलिस की कार्रवाई पर जवाब इनके पास था ही नहीं। वे बचने वाले उत्तर देते रहें।  ऐसा कोर्ट ने अपने फैसले में उल्लेख किया क्राइम ब्रांच की SI श्रद्धा यादव के मामले में भी ऐसा ही हुआ क्राइम ब्रांच द्वारा केस की टेक्निकल एनालिसिस रिपोर्ट पेश की गई रिपोर्ट पर तारीख नहीं थी और कॉल डिटेल सहित सिर्फ 3 दिन की लोकेशन पर नाराजगी जाहिर की। सुधीर शर्मा भी कोर्ट में कई बार गलत साबित हुए।

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