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इस कविता से जानें क्या होती है ‘गलती’ | What is the ‘mistake’ of this poem?

Posted on: 04 Apr 2019 14:49 by shivani Rathore
इस कविता से जानें क्या होती है ‘गलती’ | What is the ‘mistake’ of this poem?

गलती से

जो कर्ज बांचने का काम कर रहा था,
वह इतिहास बांचना चाहता था
और एक इतिहास बांचने वाले को लगता था कि
वह गलती से इस पेशे में आ गया है,
उसे तो वास्तुविद बनना था,

एक नौजवान जो परिंदों को पढ़ना चाहता था
पर वह फाइलें पढ़ने का काम करता रहा था
वह अक्सर हाथों को डैनों की तरह लहराने लगता था
और हंसी का पात्र बनता था अपने दफ्तर में

अगर गलतियों का हिसाब-किताब किया जाए
तो पता लगेगा कि जीवन भरा हुआ है गलतियों से
एक आदमी का तो कहना था कि
जिस शहर में काट लिए उसने चालीस साल
उसमें वह गलती से चला आया था

वैसे कई लोग मानते हैं कि हर बार सरकार
गलती से ही बन जाती है
लेकिन इसका पता बाद में चलता है

कुछ लोगों को जीवन में आखिरी दौर में
जब अपने किसी गलती का एहसास होता है
जब कुछ नहीं किया जा सकता
फिर भी उनमें से कई लोग बैचेन हो जाते हैं भूल सुधार के लिए
हड़बड़ा कर अपना चेहरा बदलने लग जाते हैं
पर जल्दी ही उन्हें पता चल जाता है कि
यह और भी बड़ी गलती होगी

ऐसे लोग फिर बताने लगते हैं कि
गलती से ही सही उन्होंने जो पाया वही क्या कम है
उनकी जिंदगी इतनी खराब भी नहीं.

संजय कुंदन__________

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