क्या है अनुच्छेद 142? जिसके तहत मुसलमानों को सौंपी जाएगी 5 एकड़ जमीन

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Suprime Court

नई दिल्ली। दशकों से लंबित पड़े श्रीराम जन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने राम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम पक्ष को दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया है, वहीं सरकार को ट्रस्ट बनाकर मंदिर बनाने का आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा 2010 में दिए गए फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर सुनाया है।

कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित जमीन पर रामलला का हक बताया है और वहां पर श्री राम मंदिर निर्माण की बात कही है। हालांकि कोर्ट ने येभी कहा है कि मुस्लिमों को दूसरे स्थान पर मस्जिद बनाने के लिए जमीन दिए जाने की बात भी कही है।

क्या है अनुच्छेद 142

बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों तहत मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड जमीन देने का फैसला सुनाया है। जानकारी के अनुसार अनुच्छेद 142 के अंतर्गत शीर्ष अदालत को किसी मामले में न्याय करने के लिए और निर्णय को पूरा करने के लिए ऐसे निर्णय देने की शक्ति प्राप्त है।

एएसआई रिपोर्ट बनी आधार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर कहा कि खुदाई के सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते हैं। बाबरी मस्जिद खाली जगह पर नहीं बनी थी। साथ ही खुदाई में मिली कलाकृति से मस्जिद से जुड़ी नहीं है। इसके अलावा एएसआई ने 12वीं सदी का मंदिर बताया एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर की बात कही।

सीजेआई ने से भी कहा कि विवादित ढांचे में पुराने पत्थर और खंभे का इस्तेमाल हुआ। हालांकि एएसआई ये नहीं बता पाया कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनीं हिंदू अयोध्या को रामजन्म मानते हैं। अयोध्या मामलारू आस्था और विश्वास पर कोई विवाद नहीं हो सकता। अयोध्या में राम के जन्म के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया, हिंदू विवादित जगह पर हिंदू पूजा करते रहे। चबूतरा, भंडारा, सीता रसोई से भी राम जन्म दावे की पुष्टि होती है, हिंदू परिक्रमा भी किया करते थे।

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