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हमें नाज है इन इंदोरियनस पर

Posted on: 14 Jan 2019 16:35 by Ravindra Singh Rana
हमें नाज है इन इंदोरियनस पर

विजय सुपेकर

शहर के सबसे पुराने उपनगर राजेन्द्र नगर के बाशिंदे और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ कर्मचारी विजय सुपेकर आध्यात्मिक विचारधारा व धार्मिक प्रवृत्ति के संगीत साधक-कलाकार है। उनके जिने का एक अलग ही अंदाज है। अपने उपनगर में होनेवाले हरेक रचनात्मक कार्य मे वे बढ़ चढ़कर सहभागिता निभाते है। ये मिलनसार स्वभाव का मितभाषी कलाकार अपनी संगीत प्रतिभा से वाहवाही- दाद लूटने से दूरी बनाये रखते हुए रोजाना नियमित रूप से स्वावलंबन संस्था के मानसिक रूप से कमजोर बच्चों को उनके उपचार में सहायक भक्ति संगीत सिखता है।

उनके इस जुनून से विशेष बच्चों के जीवन मे अच्छा ,सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।ये अत्यंत संवेदनशील समाजसेवी संगीतज्ञ इन बच्चों को सबसे पहले संगीत के अलंकार की प्रेक्टिस करवाता है ।जब ये भजन अथवा भक्ति संगीत प्रस्तुत करना शुरू करते है तभी से बच्चे भी अपने आप गाना शुरू करते है। इसमें से कुछ बाल कलाकार हारमोनियम बजाना भी सिख चुके है।संगीत की शिक्षा से इन बच्चों के बर्ताव में काफी बदलाव आया है।

सुपेकर जी का मानना है कि इस कार्य से मुझे बेहद आत्मिक शांति व आनंद मिलता है।बच्चों का प्यार पाकर वे बहुत खुश है। उनके साथ इन बच्चों के गाने सुनना और ये नजारा देखने मे एक अलग ही आनंद की अनुभूति होती है।सुपेकर एक दशक से अपने ऑफिस के लंच टाइम में विशेष बच्चों को निस्वार्थ भाव से भक्ति संगीत सिखा रहे है। विशेष उल्लेखनीय बात ये है कि सुपेकर जी जयपुर में राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।

 

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