यह कोई मामूली खबर नहीं है, यह खबर बताती कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था के हर मोर्च पर फेल साबित हुई है

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कल जीएसटी परिषद 30वीं बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि चालू वित्त वर्ष के पहले पाँच महीने में अप्रैल से अगस्त तक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत 10 राज्यों को राजस्व संग्रह में 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा का नुकसान हुआ है पहले वर्ष अगस्त 2017 से मार्च 2018 तक राज्यों का राजस्व घाटा 16 प्रतिशत रहा था यानी पिछले साल से भी ज्यादा नुकसान इस साल देखने मे आ रहा है।

तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, असम और पश्चिम बंगाल को सात प्रतिशत तक राजस्व नुकसान हुआ है जबकि राजस्थान, गुजरात, हरियाना, मेघालय, मध्य प्रदेश, झारखंड, केरल, त्रिपुरा और दिल्ली का राजस्व नुकसान दहाई अंक में 12 से 19 प्रतिशत के बीच है।

जीएसटी जब लागू किया गया था तो इसका सबसे बड़ा फायदा जो बताया गया था वह यह था कि उपभोक्ता राज्यों का राजस्व संग्रह बढ़गा तथा उत्पादक राज्यों को नुकसान होगा। लेकिन जीएसटी से प्राप्त हुए अब तक के आँकड़े जो तथ्य दर्शा रहे हैं उस से यह मिथ भी टूट गया है।

अब यहाँ इस बात को समझना आवश्यक है कि जीएसटी लागू करते वक्त केंद्र सरकार ने पाँच साल तक हर राज्य को राजस्व नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया था और इसके लिए राज्यों के 2015-16 के राजस्व संग्रह को आधार माना गया था ओर सरकार ने हर वर्ष 14 प्रतिशत सालाना राजस्व वृद्धि की बात कही थी।

अब वृद्धि की बात तो अलग रही जितना राज्य सरकारों को कर के रूप में आय होती थी उतना भी केंद्र सरकार नही दे पा रही है, जब खर्च करने के लिए पैसा होगा ही नहीं तो विकास के कार्य करेंगे कैसे, चुनावी साल होने के कारण भाजपा शासित राज्यों लोकलुभावन योजना का दौर चल रहा है और सरकारी खजाने में पैसे है नही। यानी कुल मिलाकर आमदनी अठन्नी ओर खर्चा रुपया वाली बात हो गयी है।

गिरीश मालवीय की कलम से 

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