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भारतीय रिटेल को नुकसान पहुंचाएगा वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदा…

Posted on: 10 May 2018 07:07 by Ravindra Singh Rana
भारतीय रिटेल को नुकसान पहुंचाएगा वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदा…

इंदौर: भारत का विशाल रिटेल बाज़ार दुनियाभर की बड़ी कंपनियों को लुभाता रहा है और हर बड़ी कंपनी इस बाज़ार का हिस्सा बनना चाहती है। हालांकि रिटेल में एफडीआई पर काफी बंदिशें हैं इसलिए दुनिया भर की बड़ी कंपनियां ई-कॉमर्स के रास्ते भारतीय बाज़ार में दाखिल होना चाहती है। दरअसल, भारत की 65% आबादी 35 साल से कम उम्र की है और ये चीजों को ऑनलाइन खरीदने में खासा यकीन रखती है। इसीलिए भारत के ऑनलाइन रिटेल में अमेज़न ने जहां डायरेक्ट एंट्री ली है वहीं चीन की अलीबाबा डॉट कॉम ने पेटीएम में निवेश किया है।

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कुछ समय पहले तक माना जा रहा था कि अलीबाबा पेटीएम में निवेश के बाद फ्लिपकार्ट, स्नैपडील और शॉपक्लूज़ में बह इन्वेस्ट करेंगी और भारतीय ई-कॉमर्स में अमेरिकन अमेज़न और चीनी अलीबाबा लड़ेंगे लेकिन वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट को खरीदकर पूरा गेम बदलकर रख दिया है।

अमेज़न, पेटीएम और वॉलमार्ट में एक बेसिक फर्क है और वो ये कि अमेज़न और पेटीएम एक प्योर मार्केटप्लेस और वो एक सुई भी नहीं बनाते लेकिन वॉलमार्ट एक रिटेल जायंट है और अमेरिका में वो खुद के ब्रांड के बहुत सारे सस्ते प्रोडक्ट बेचते हैं।Image result for flipkart walmart

वॉलमार्ट का असल खतरा यहीं से शुरू होता है, वॉलमार्ट भारत में पहले ही थोक के कारोबार में है, हालांकि ये थोक भी सिर्फ दिखाने का है क्योंकि आप और हम में से कोई भी एक छोटी किराना दुकान का नकली कार्ड बनाकर यहां से सामान ले सकता है और ऐसा कई लोग कर रहे हैं। इंदौर के थोक बाजार को इसने ज़बरदस्त नुकसान पहुंचाया है लेकिन ये कभी चर्चा में नहीं आता। वॉलमार्ट के इस चोर रास्ते पर कोबरा पोस्ट एक बड़ा स्टिंग ऑपेरशन कर चुका है।

वॉलमार्ट का ये कॉम्बिनेशन भारतीय रिटेलर्स के लिए बेहद खतरनाक है क्योंकि वॉलमार्ट अब फ्लिपकार्ट को भी अपने खुद के सस्ते सामानों से भर सकता है। फ्लिपकार्ट पर एक लाख से ज़्यादा छोटे रिटेलर्स है और वॉलमार्ट इन्हें अपने थोक बाजार से सस्ते दामों में सामान देकर फ्लिपकार्ट पर प्राथमिकता से बेच सकता है।

वॉलमार्ट के इन्हीं इरादों को भांपकर फ्लिपकार्ट के सेलर्स एसोसिएशन ने कम्पटीशन कमीशन ऑफ इंडिया में एक अर्ज़ी देकर कहा है कि वॉलमार्ट अपने सस्ते प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए फ्लिपकार्ट के एल्गोरिदम में परिवर्तन कर सकता है जिससे ग्राहक को वॉलमार्ट के प्रोडक्ट्स ही प्राथमिकता पर दिखेंगे और उनके प्रोडक्ट्स नहीं बिक पाएंगे, तो वॉलमार्ट को ऐसा करने से रोक जाए।

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इतना ही नहीं, वॉलमार्ट भारतीय रिटेल के लिए चीनी सामानों से भी बड़ा खतरा साबित हो सकता है क्योंकि चीनी सामानों की घटिया क्वालिटी भारतीय उपभोक्ताओं को बड़े पैमाने पर नहीं लुभा पाई लेकिन वॉलमार्ट के प्रोडक्ट की अमेरिकन क्वालिटी जल्दी जगह बना सकती है। दूसरा, वॉलमार्ट की सबसे बड़ी ताक़त बाज़ार पर कब्ज़ा जमाने के लिए सालों तक नुकसान सह सकने की क्षमता है। वॉलमार्ट अगले 20-25 साल नुकसान उठाकर भी कारोबार कर सकता है जिससे भारतीय रिटेल के एक बड़े हिस्से पर अधिकार जमाया जा सके।

इसीलिए वॉलमार्ट ने फ्लिपकार्ट में हिस्सा 22 बिलियन डॉलर के वैल्युएशन पर खरीदा है जबकि एक साल पहले तक फ्लिपकार्ट को 16 बिलियन डॉलर के वैल्युएशन पर भी खरीददार नहीं मिल रहा था।

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– आलोक वाणी
लेखक घमासान डॉट कॉम के संपादक है और सीएनबीसी-आवाज़ के साथ काम कर चुके हैं।

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