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वाह रे इंदौरी कॉल सेंटर, ढाई लाख अमेरिकी लोगों को डरा कर छीन लिए करोड़ों डाॅलर, देखिए ऑनलाइन ठगी की पूरी कहानी

Posted on: 12 Jun 2019 09:45 by Pawan Yadav
वाह रे इंदौरी कॉल सेंटर, ढाई लाख अमेरिकी लोगों को डरा कर छीन लिए करोड़ों डाॅलर,  देखिए ऑनलाइन ठगी की पूरी कहानी

अर्जुन राठौर
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को निश्चित रूप से अब भारतीयों के इस हुनर पर गर्व हो जाना चाहिए कि वे 10 लाख से अधिक अमेरिकियों का डाटा चुरा कर ढाई लाख अमेरिकी लोगों से करोड़ों डाॅलर छीन सकते हैं। अभी तक अमेरिकी लोगों को यह गर्व रहा है कि वे पूरी दुनिया को बेवकूफ बना सकते हैं और वे सिरमोर हैं, लेकिन इंदौर के इस कॉल सेंटर ने यह बता दिया है कि इंदौरी काल सेंटर वाले भी अमेरिका के लोगों से कम नहीं है।

क्या कोई सोच सकता है कि प्लेटिनम प्लाजा में खोले गए एक कॉल सेंटर में रात 9.00 बजे बाद एक ऐसा काला कारोबार जन्म लेता था, जिसमें करोड़ों रुपए की ठगी भारत में नहीं, बल्कि अमेरिका में की जाती थी 80 लोगों से ज्यादा के इस कॉल सेंटर का जब भंडाफोड़ हुआ तो साइबर क्राइम के इंदौर के अधिकारी भी दंग रह गए कि किस तरह से सुनियोजित ढंग से यह कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था।

आइए आपको बताते हैं इस के सरगना के बारे में इसके सरगना है जावेद भावेल और शाहरुख इन तीनों को लेकर पुलिस का यह कहना है कि अहमदाबाद में रहने वाले राहिल और जावेद ने करीब 1 साल पहले कॉल सेंटर शुरू किया था और उसके बाद यह दोनों महाराष्ट्र, गुवाहाटी और नोएडा में जो कॉल सेंटर बंद हुए थे, उनके लोगों को पकड़कर इंदौर ले आए। इसके बाद प्लेटिनम प्लाजा में राहिल और जावेद ने 2 फ्लोर लेकर एक 25 सीटर का कॉल सेंटर तथा राहिल और शाहरुख ने मिलकर 50 सीटर का एक कॉल सेंटर शुरू किया इसके बाद यहां पर 80 से ज्यादा कर्मचारी रखे गए।
आइए अब देखते हैं यह कॉल सेंटर ठगी कैसे करता था

इस कॉल सेंटर से ठगी करने का जो मामला सामने आया है वह बेहद चैंकाने वाला है और साइबर क्राइम के अधिकारी तक इस बात से हैरान हैं कि किस तरह से लाखों डॉलर की ठगी रोजाना की जाती थी। कॉल सेंटर के तीनों सरगना जावेद भावेल और शाहरुख थे। इन्होंने योजना यह बनाई कि अमेरिकियों का डाटा चुराया जाए और उसके बाद उन्हें ड्रग ट्रैफिकिंग से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर धमकी दी जाए और उनसे पैसे बैंकों के खाते में डलवाए जाए।

कुल मिलाकर ठगी की योजना इस तरह से बनी अब सबसे पहला सवाल यह है कि 10 लाख अमेरिकी लोगों का डाटा कैसे चुराया गया आखिरी यह डाटा इन सरगनाओं को कैसे मिला, क्या इसमें अमेरिका की किसी कंपनी का हाथ है या फिर उन्होंने किसी हैकर की सेवाएं ली, जिसने इन्हें 10 लाख लोगों का डाटा उपलब्ध करा दिया। बाहर हाल 10 लाख लोगों का डाटा लेने के बाद शुरू हुआ इनका ठगी का कारोबार डाटा में शामिल लोगों को यह विभिन्न सॉफ्टवेयर के माध्यम से 10000 लोगों को वॉइस मैसेज भेजा करते थे और यह बताया जाता था, उसमें कि आपका नाम ड्रग ट्रैफिकिंग में आ रहा है और इसके साथ ही एक टोल फ्री नंबर भी दे दिया जाता था, जिसमें यह धमकी होती थी कि अगर टोल फ्री नंबर पर संपर्क नहीं किया गया, तो वह गंभीर कानूनी कार्रवाई में फंस सकते हैं।

डर कर लोग जब टोल फ्री नंबर पर फोन करते थे, तो फिर उन्हें कहा जाता था कि वे किसी तरह से सेटलमेंट कर लें सेटलमेंट करने के बाद जो राशि होती थी, उसे किराए के बैंक अकाउंट में डलवा लिया जाता था। इसका तरीका भी पुलिस ने जो बताया है, उसके अनुसार गिफ्ट कार्ड वायर ट्रांसफर और किराए पर बैंक अकाउंट लेकर उसमें राशि डलवा ली जाती थी। पुलिस के अनुसार इन्होंने युवाओं को लड़कियों को नौकरी पर रखा था उन्हें स्क्रिप्ट दी गई थी, जिसमें प्रश्न थे उत्तर थे, ताकि अमेरिका के लोगों से बात की जा सके|

अब सवाल इस बात का भी है कि डायरेक्ट इंटरनेशनल डायलिंग इन्हें कहां से मिली तो इसके बारे में पुलिस का यह कहना है कि इन्होंने 60000 में यह व्यवस्था यानी डायरेक्ट इंटरनेशनल डायलिंग सेवा ले रखी थी, जिसके माध्यम से फोन किए जाते थे। रात 9.00 बजे बाद शुरू होता था। ठगी का कारोबार प्लेटिनम प्लाजा जोकि सी-21 मॉल के पीछे मल्टी स्टोरी बिल्डिंग है इसमें रात को 9.00 बजे से सारे कर्मचारी अंदर आ जाते और फिर इसमें बाहर से शटर लगाकर ठगी का कार्य शुरू हो जाता था।

80 कर्मचारी आखिर आए कहां से

इस ऑनलाइन ठगी की के कार्यालय में 80 से ज्यादा कर्मचारी रखे गए थे और पता चला है कि यह सभी इंदौर से बाहर के थे, इन्हें नागालैंड, दिमापुर और मेघालय से लाया गया था और इन्हें 20000 से लेकर 30000 प्रति माह वेतन दिया जाता था। सबसे बड़ी बात यह है कि सभी कर्मचारियों को इस बात का पता था कि वे अपराध कर रहे हैं इसके बावजूद नौकरी की सुरक्षा के चक्कर में वे इस अपराध में शामिल होते चले गए यह भी पता चला है कि 100 की ठगी करने पर कॉल सेंटर के कर्मचारी को 500 का इंसेंटिव मिलता था। पुलिस को यह भी पता चला है कि सभी जो कर्मचारी हैं वह अच्छे घरों से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन नौकरी के चक्कर में इस गिरोह की जाल में फंस गए और सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें 19 लड़कियां भी है इन सभी को जब कोर्ट के सामने पेश किया गया तो कोर्ट ने इन्हें 26 जून तक के लिए जेल भेज दिया

क्या अमेरिका के लोग भी इसमें शामिल हैं

साइबर क्राइम की पुलिस स्थिति की भी जांच कर रही है कि क्या अमेरिका के लोग भी इस ठगी में शामिल हैं। क्या अमेरिका में एजेंट इनकी मदद कर रहे हैं, क्योंकि सवाल इस बात का है कि इन्हें डाटा कहां से मिला यह गंभीर तथ्य है। इधर यह भी कहा जा रहा है कि इनके कई एजेंट अमेरिका में सक्रिय हैं, जो इन्हें वहां की जानकारियां उपलब्ध करा देते थे अब साइबर क्राइम द्वारा अमेरिकी पुलिस को भी इस पूरे फ्रॉड की जानकारी दी जा रही है। इसी बीच पुलिस को अमेरिका के लोगों से बातचीत के रिकॉर्डिंग भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें यह बताया जा रहा था कि कैसे इंग्लिश टोन में बात की जाए।

साइबर क्राइम कोई अभी पता चला है कि इस कॉल सेंटर में ठंडी के माध्यम से 10000000 रुपए प्रतिमाह कमाए जाते थे, जिसमें से अमेरिका तथा विदेशी एजेंट को रुपए ट्रांसफर कराने के लिए 40 फीसदी कमीशन दिया जाता था और यह भी पता चला है कि 35 से 40 लाख की बचत इस कॉल सेंटर में हो जाती थी रात में यही रुपया इंदौर में पब और रेस्टोरेंट खोलने में लगाया गया। साइबर क्राइम इस बात की जांच में भी जुटी है कि यह पावर एस्ट्रो कहां खोले गए हैं और इनके संचालक कौन है।

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