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ऊंची दुकान……

Posted on: 01 Feb 2019 18:05 by Surbhi Bhawsar
ऊंची दुकान……

विश्वास व्यास

सुबह की सैर पर मिले , तो वह बड़े उखड़े उखड़े से थे| मैंने लखनवी अंदाज में पूछा “दुश्मनों की तबीयत नासाज लग रही है’ वो लगभग चिढ़कर बोले यहां दोस्तों ने तबीयत बिगाड़ रखी है ,मेरे घर के बाहर 3 दिनों से झाड़ू नहीं लग रही है और तुम यहां उर्दू झाड़ रहे हो । अचानक हुए इस हमले से सचमुच मेरी उर्दू ,लखनवी लहजा वगैरह सब का काफूर हो गया।

मैं शुद्ध देसी इंदौरी तरीके पर आ गया, भिया को बोला तो था मैंने कल, फोन लगा कर, अभी तक नहीं हुआ क्या ?
अरे देख लिया तुमको और तुम्हारे भैया को , ऐसा पार्षद है कि झाड़ू नहीं लगा पा रहा अब मिलेगा तो उसे सिखाऊंगा कि पार्षदी कैसे होती है ,तुम देख लो तुम्हारा दोस्त है तो कह रहा हूं वरना मैं अगले हफ्ते महापौर का अविश्वास प्रस्ताव करवा रहा हूं फिर मत कहना हां ! सब निपट जाएंगे। मतलब वे महापौर को हटवा देंगे !

वे ऐसे ही है। लोगों को हटवाने का कोई मठ होता तो वे मठाधीश होते। पटवारी ना सुने तो कलेक्टर को हटवा दें, विधायक ना सुने तो सीएम को। यह अलग बात है कि उनके घर के बाहर का कचरा नहीं हटवा पा रहे हैं और वे चाहते हैं कि मैं अपने पार्षद मित्र से कहकर उनके शौर्य की कहानियों से पक चुके सफाई कर्मी पर दबाव डालकर सफाई करवा दूं अन्यथा वे महापौर ,कमिश्नर, कलेक्टर सब को हटवा देंगे अगले हफ्ते।

वे हटवा भी दें पर समय का फेर ऐसा है कि कमबख्त अगला हफ्ता आता ही नहीं ,हर हफ्ते आगे बढ़ जाता है शायद इन्हीं के डर से कि न जाने किस-किस को हटवा दें! वे पढ़े-लिखे आदमी है और राग दरबारी के भीखमखेड़वी की तरह अच्छे दिनों में (वास्तविक अर्थ में पढ़े इसका मोदी युग से कोई संबंध नहीं है )दिल्ली भोपाल में रह चुके हैं सो उनके पास नेताओं अधिकारियों और उनसे भी आगे बढ़कर उनके पीए लोगों के संपर्क सूत्र हैं ।

जितने लोगों को वह वास्तव में जानते हैं उससे ज्यादा लोगों के नाम ओहदा, पोस्टिंग और विशेष रूप से उनके “कांड’ याद रखते हैं ,ताकि वक्त जरूरत बताया जा सके कि फला “कांड’ से उसको बचा के कौन लाया? स्वाभाविक है वे ही लाए होंगे

उनके अनुसार देश के सारे बड़े राजनीतिज्ञ, जीवन के किसी ने किसी समय उनसे प्रभावित रहे है और देश के पिछले 25 सालों के सारे राजनीतिक फैसलों की रायशुमारी उनसे की गई है। सारे बड़े घटनाक्रमों के वे सलाहकार ,साझेदार, साधन, साध्य और साक्षी रहे है। उनकी कम उम्र की गिनती अर्थेमेटिक मजबूरी है वरना वे पार्टी की स्थापना का श्रेय भी ले सकते हैं।

कभी-कभी जब सुनने वाला विनम्रता और सहनशीलता की सुपरलेटिव डिग्री पर होता है तो वह यह बताने से भी नहीं चूकते कि कैसे प्रधानमंत्री निवास तक उनकी पहुंच रही है और प्रधानमंत्री ने कौन से निर्णय इन की सलाह पर लिए।

वे सरकार को नीति निर्माण में, मंत्री को नीति लागू करने में और अफसरों को नीति विखंडन मतलब उसे तोड़ने की सलाह कई बार देते रहे है। वे इतिहास के संपर्कवान व्यक्तियों की मेरिट लिस्ट से आते हैं। हर बड़ा उद्योगपति उनका मित्र है ,फिल्म स्टार उनका चेला, क्रिकेटर उनकी सलाह पर अपना खेल दुरुस्त करते हैं तो पत्रकार अपनी भाषा।

आजकल पता नहीं क्यों उनकी प्रतिभा उपेक्षित है या आत्म निर्वासन जैसा कुछ है अन्यथा इस राज्य में उनकी सलाह के बगैर राजनीति करना मुश्किल है बकौल उनके वे बात न मानने पर दो मुख्यमंत्री हटवा चुके हैं पर समय का फेर देखिए 3 दिनों से घर के सामने का कचरा नहीं हटवा पा रहे है।

इससे पहले कि वह मुझे कहीं से हटवाने की मुहिम शुरू करें ,मैं उन्हें वहीं छोड़ कर आ गया हूं किसी और के हटाए जाने की नई कहानी सुनने के इंतजार में।

vishwas vyas

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